* कवक शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द फंगस से हुई है,जिसका शाब्दिक अर्थ है, छत्रक अथवा मशरूम है।
* विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत कवकों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है माइकोलॉजी कहलाता है। कवक पर्णहरित, संवहन उत्तक रहित थैलोफाइटा समूह के जीव हैं। इनमें जड़,तना तथा पत्ती का अभाव होता है। यह परजीवी अथवा मृतोपजीवी होतेे हैं। तथाा इनमें जनन बीजाणु द्वारा होता है।
* इनका मानव जीवन से घनिष्ठ संबंध है इनकी अनेक जातियां मानव के लिए लाभदायक या हानिकारक होती है ।
* एफ्लाटॉक्सिन नामक जहरीला पदार्थ प्राकृतिक रूप से कैंसर कारक होता है, जो यकृत कैंसर उत्पन्न करता है ।
* एथलीट फुट नामक बीमारी ट्राईकोफाईटोंन व टेनिया पेडिस नामक को को द्वारा होती है यह त्वचा के मुलायम हिस्से को संक्रमित करता है खासतौर पर अंगुलियों के मध्य में। * इसरो का संक्रमण संक्रमित मृदा से होता है ।
* त्वचा का प्रदाह, गंजापन, कैंडीडायसिस, जिओट्राईकोसिस आदि रोग कोको द्वारा उत्पन्न होते हैं।
* बहुत से कवक के उदाहरण छत्रक, गुच्छी, लाइकोपरडोन इत्यादि भोजन केेे रूप में प्रयोग किए जातेे हैं जो प्रोटीन के मुख्य साधन है । किंतु गलती वस यदि अमानीटा नामक कवक एगेरिकस के बदले खा लिया जाए तो खाने वालेे की मृत्यु हो जाती है, क्योंकि यह जहरीला होता है ।