माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत । भाग- 3

Continue....

नव माल्थस वादी सिद्धान्त के अंतर्गत ही 1972 ई० में ' क्लब ऑफ रोम ' के द्वारा प्रतिपादित , ‘ वृद्धि की सीमाएँ ' ( The Limits to Growth ) सिद्धांत अत्यधिक महत्त्व रखती है ।

यह मीडोज , रेंडर्स व बहरेन्स आदि विद्वानों द्वारा विकसित किया गया था । इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी के संसाधन सीमित हैं । अतः जनसंख्या में तीव्र वृद्धि वैश्विक ध्वंस ( Global Collapse ) की स्थिति पैदा करेगा । वृद्धि की सीमाएँ सिद्धान्त के द्वारा दिए गए मॉडल में पाँच तत्व शामिल थे —

( i ) जनसंख्या वृद्धि ,

( ii ) प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उत्पादन ,

( iii ) प्रति व्यक्ति औद्योगिक उत्पादन ,

( iv ) प्राकृतिक संसाधन एवं

( v ) पर्यावरण प्रदूषण 

Club of Rome  ने इन पाँचों के संदर्भ में अधिकतम सीमा पर चर्चा की । उनके अनुसार 1970 ई० के उपयोग स्तर पर अनवीनीकरण योग्य संसाधन 250 वर्षों में समाप्त हो जाएँगे एवं नवीनीकरण योग्य संसाधनों की भी अपनी सीमाएँ हैं । संसाधनों की तुलना में जनसंख्या वृद्धि अधिक होने की अवस्था 2100 ई० से पूर्व ही आ जाएगी क्योंकि उस समय विश्व की जनसंख्या 10 अरब से अधिक होगी । अतः विश्व को चाहिए कि 2050 ई . तक जनसंख्या को शून्य वृद्धि ( Zero Growth ) पर स्थिर करने का प्रयास करे । इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विकासशील देशों में जन्म दर घटाने की दिशा में ठोस प्रयास किये जाने आवश्यक हैं ।

Posted on by