जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत पौधों के रोगों के लक्षणों कारणों हेतुकी, रोग चक्र रोगों से हानि एवं उनके नियंत्रण का अध्ययन किया जाता है पादप रोग विज्ञान कहलाता है। पादप रोग विज्ञान या फाइटोपैथोलॉजी शब्द की उत्पत्ति ग्रीक के तीन शब्दो 'Phyton-पादप', Pathos-रोग',तथा 'Logos-ज्ञान' से बना है , जिसका शाब्दिक अर्थ है पादप रोगों का ज्ञान का अध्ययन।
* बुकनी रोग या पाउडरी मिल्ड्यू के कारण प्रभावित पौधे की पत्तियों पर सफेद चूर्ण सा जम जाता है। यह रोग कवकों की प्रजातियों के कारण होता है इस रोग से जौ, गेहूं ,मटर ,प्याज ,सेब, नाशपाती अधिक प्रभावित होते हैं।
* हरीश बाल रोग बाजरे में पाया जाता है इसमें बाजरे की बालियों के स्थान पर टेढ़ी-मेढ़ी हरी- हरी पत्तियां सी बन जाती है। जिसे पूर्ण बाली झाड़ू के समान दिखाई देती है।
* गन्नापूर्ण या फुदकी या पैरीला एक छोटा सा पतंगा होता है जो गन्ने की पत्तियों एवं तने का रस चूसता है। इसमें गन्ने की फसल की वृद्धि रुक जाती है तथा वह सुखा सा हो जाता है। यह गीत गन्ने के लिए अत्यंत ही हानिकारक होता है।
* सरसों एक महत्वपूर्ण कवक जनित रोग सफेद किट्ट है जो कि सिस्टोपस कैंडिडा एवं एल्बुगो कैंडिडा द्वारा होता है। इस रोग में पौधे के तने पति तथा पुष्प क्रम पर गहरे उतरे सफेद रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं ।