जनन एवं भ्रूणीय विकास

* वह प्रक्रम जिसके माध्यम से जियो अपनी संख्या में वृद्धि करता है प्रजनन कहलाता है।* प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों को प्रजनन अंग तथा जीव विशेष के सभी प्रजनन अंगों को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र कहते हैं

*प्रजनन के माध्यम से प्रत्येक जीवधारी अपने संबंधियों को पैदा करता है। मानव भी अन्य कशेरुकाओं की तरह एक लिंगी होता है। अर्थात इनमें नर तथा मादा के जननांगों और लैंगिक लक्षणों में भिन्नता होती है। पुरुषों में 1 जोड़ी वृषण स्त्रियों में 1 जोड़ी अंडाशय प्रमुख जननांग होते हैं।

* मानव में निषेचन की प्रक्रिया एंड वाहिनी या फैलोपियन नली में संपन्न होती है

*यहां नर युग्मक तथा मादा युग्मक में निषेचन क्रिया के द्वारा जायगोट का निर्माण होता है, जो कि द्विगुणित होता है। और विकास कर शिशु का निर्माण करता है।

* मनुष्य में जन्म के समय निषेचन के बाद आदर्श रूप से 266 दिन या 38 सप्ताह का होता है। * मादा जनन पथ में पहुंचने के पश्चात शुक्राणु निषेचन क्षमता समानता 48 घंटे तक तथा कभी-कभी 72 घंटे तक सुरक्षित रहती है जबकि अंडोत्सर्ग के बाद अंडर कोशिका लगभग 12 से 24 घंटे तक निषेचन के योग बने रहते हैं।

* निषेचन क्रिया के बाद युग्मनज अर्थात जाइगोट मैं विभाजन प्रारंभ हो जाता है तथा मॉरुला,  ब्लास्तुला का निर्माण होता है।

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