वर्ष 2019 - 20 के बजट में भारत सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 750 करोड़ रुपए के आवंटन की घोषणा की है जिसे कि देशी नस्ल की गायों और सांडों की संख्या में बढ़ोत्तरी तथा दूध उत्पादन में वृद्धि हो सके ।
मुख्य बिंदु-------
राष्ट्रीय गोकुल मिशन को देशी गायों और भैंसों की नस्लों के विकास और उनके संरक्षण के उद्देश्य से दिसंबर 2014 में शुरू किया गया था जिसे दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है ।
केंद्र सरकार दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निर्मित राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से राज्यों को सहायता कर रही है ।
इस मिशन के तहत गायों और भैंसों की 6 - 6 स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण पर ध्यान केन्द्रित किया गया है । गायों की 6 देशी नस्लें:- गिर, साहिल, राठी, कांकरेज, थारपारकर व हरियाणा है, तथा भैंसों की 6 नस्ले:- मुर्रा, मेहसानी, जाफराबादी, नीली रवि, पंढरपुरी और बन्नी हैं ।
राष्ट्रीय गोकुल योजना के तहत "गोकुल ग्राम" नामक स्वदेशी केंद्र की स्थापना के लिए राशि आवंटित की जाएगी गांव में गोकुल ग्राम की स्थापना उन क्षेत्रों में की जाएगी जहां देशी नस्लों का मूल स्थान है, तथा शहरी पशुओं को बड़े-बड़े नगरों की नजदीक रखा जाएगा ।
गोकुल ग्राम केंद्रों में देशी नस्ल के पशु विकसित की जाएंगे तथा जहां से किसानों को देशी नस्ल के पशु की आपूर्ति की जाएगी । गोकुल ग्राम एक आत्मनिर्भर केंद्र होगा जिसके आय का मुख्य श्रोत है- A2 दूध की बिक्री, जैविक खाद, वर्मी खाद, गोमूत्र तथा बायोगैस से उत्पन्न बिजली जिसकी खपत गोकुलधाम में ही होगी आदि ।