12 फरवरी 2019 को सिनेमेटोग्राफ संशोधन विधेयक 2019 को राज्य सभा में प्रस्तुत किया गया जिसके अंदर फिल्मों की चोर बाजारी (Piracy) की समस्या से लड़ने के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है ।
विधेयक के मुख्य प्रावधान--------
इस विधेयक में सिनेमेटोग्राफ कानून 1952 के प्रावधानों में संशोधन की व्यवस्था है, ताकि गैर-कानूनी तरीके से फिल्मों की प्रतिलिपि तैयार करने अथवा कैमरे से रिकार्ड करने पर डण्ड के प्रावधान शामिल हो सके ताकि फिल्मों की Piracy को रोका जा सके ।
इसका उद्देश्य पाइरेसी की जांच करना और इसे रोकना है क्योंकि इंटरनेट पर फिल्मों के पारेटेड वर्जन के रिलीज होने से फिल्म उद्योग और एक्साइज को भारी नुक़सान पहुंचता है।
इस विधेयक में फिल्मों की चोर - बाजारी (Film Piracy) के लिए 3 वर्ष तक के कारावास और 10 लाख रुपय के जुर्माने तक के अर्थदंड या दोनों का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि वह प्रत्येक व्यक्ति दंड का आधिकारी होगा जो कॉपीराइट स्वामी के लिखित अनुमति के बिना किसी भी फिल्म की प्रतिलिपि बनाने या संचारित करने के लिए किसी रिकॉर्डिंग डिवाइस का उपयोग करता है या ऐसा करने का प्रयास करता है या ऐसी प्रतिलिपि बनाने या प्रसारित करने के लिए प्रोत्साहित करता है ।
इससे फिल्म उद्योग की आय में वृद्धि होगी रोजगार सृजन होगा और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति के महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करने में सफलता मिलेगी ।
(जीके फैक्ट)
उल्लेखनीय है कि इससे पहले चलचित्र अधिनियम और नियमों की समीक्षा करने वह सिफारिशें देने के लिए वर्ष 2013 में मुदगल समिति तथा वर्ष 2016 में श्याम बेनेगल समिति का गठन भी किया गया था ।