हाल के समय में भारत ने यूरोप एवं अमेरिका के साथ - साथ पश्चिम एशिया के साथ भी संबंधों को मजबूती देने का प्रयास किया है । ईरान , सऊदी अरब , संयुक्त अरब अमीरात , इजरायल , फिलिस्तीन जैसे देशों के साथ भारत ने घनिष्ठता स्थापित करने का प्रयास किया है । भारत की इस नीति को ' लुक वेस्ट पॉलिसी ' का नाम दिया जा रहा है।
लुक वेस्ट पॉलिसी के सकारात्मक पक्ष
भारत ने इजरायल के साथ संबंधों को मजबूत बनाया है , किंतु फिलिस्तीन के साथ अपने संबंधों को बिगड़ने नहीं दिया है । इसी प्रकार भारत ने ईरान के साथ - साथ सऊदी अरब एवं संयुक्त अरब अमीरात से भी संबंधों को सशक्त स्थिति में रखा है । आतंकवाद , ऊर्जा सुरक्षा एवं वैश्विक ध्रुवीकरण के संबंध में भारत एवं पश्चिमी एशियाई देशों की चिंतायें एक जैसी हैं । भारत एवं पश्चिम एशियाई देशों के बीच पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट बढ़ता जा रहा है । भारतीय व्यंजन एवं फिल्में पश्चिम एशियाई देशों में पसंद की जा रही हैं । बड़ी संख्या में भारतीय डायस्पोरा पश्चिम एशियाई देशों में निवास कर रहे हैं ।ये न सिर्फ भारतीय संस्कृति का प्रचार - प्रसार करते हैं , बल्कि भारी मात्रा में रेमिटांस भी भारत में भेजते हैं ।
लुक वेस्ट पॉलिसी के नकारात्मक पक्ष
पश्चिम एशियाई देशों के बीच आपसी संघर्ष लगातार जारी है , जो भारत की नीति को अधिक कारगर नहीं होने दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर , यमन , सीरिया में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं इसी प्रकार ईरान एवं सऊदी अरब के बीच मतभेद हैं । अरब लीग एवं जीसीसी ( खाड़ी सहयोग परिषद् ) जैसे संगठन निष्क्रिय बने हुए हैं । भारत की ' लुक ईस्ट नीति ' सफल रही है क्योंकि पूर्व में आसियान जैसा मजबूत संगठन है ।जबकि पश्चिम एशिया में आसियान जैसा कोई मजबूत संगठन नहीं है ।अत : भारत की ' लुक वेस्ट नीति ' की सफलता संदेहास्पद है ।
भारत के द्वारा उठाये जाने वाले कदम
भारत को पश्चिम एशियाई देशों के आपसी विवादों में नहीं उलझना चाहिए तथा प्रत्येक देश से द्विपक्षीय संबंध स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए । पश्चिम एशियाई देशों के साथ आर्थिक मुद्दों , पीपुल टू पीपुल कांटेक्ट तथा सूचना - प्रौद्योगिकी के मामले में आपसी संबंधों को मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए ।