बाघ संरक्षण पर तीसरा अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन 28 - 29 जनवरी को दिल्ली में आयोजित किया गया ।
परीक्षा बिंदु-----
सम्मेलन का उदघाटन केंद्री पर्यावरण एवं वन मंत्री और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ हर्षवर्धन द्वारा किया गया । यह 2012 के बाद भारत में आयोजित होने वाला दूसरा समीक्षा सम्मेलन है ।
सम्मेलन का आयोजन 'ग्लोबल टाइगर फोरम' द्वारा 'ग्लोबल टाइगर इनेशिएटिव काउंसिल' (Global Tiger Intiative Council- GTIC), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण
प्राधिकरण (भारत सरकार), WWF, वन्यजीव संरक्षण ट्रस्ट और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के सहयोग से किया गया ।
सम्मेलन में रामनगर वन प्रभाग उत्तराखंड को 'कैट्स मानक' (Conservation Assured Tiger Standards (CATS) प्रमाण पत्र हाशिल किए जाने को मान्यता दी गई ।
'कैट्स' बाद संरक्षित स्थलों में सर्वोत्तम प्रबंधन प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए इस्तमाल किया जाने वाला एक मानक है। यह 7 संरक्षण प्रबंधन स्तंभ तथा 17 संबंधित मानकों पर आधारित है ।
वर्ष 2006 में भारत में 1411 बाघ होने का अनुमान था जो कि वह 2014 में अखिल भारतीय बाघ अनुमान क्षेत्री चक्र के बाद दोगुना होकर 2226 हो गया । वर्तमान में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2018 का चौथा चक्र जारी है ।
( जीके फैक्ट)
के रेंज में 13 देश हैं-- भारत, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम ।
'ग्लोबल टाइगर फोरम' एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय अंतर- सरकारी निकाय है जो बाघों की सुरक्षा के लिए '1993' में नई दिल्ली में स्थापित किया गया 1997 में, यह एक स्वतंत्र संगठन बना ।