ब्रेक्जिट के विषय में जानकारी

यह मुख्यत : दो शब्दों ब्रिटेन ( Britain ) और एग्जिट ( Exit ) से मिलकर बना है , जिसका अर्थ ब्रिटेन का यूरोपीय संघ ( European Union - EU ) से बाहर निकलना है।

 ब्रिटेन की जनता ने ब्रिटेन की पहचान , आजादी और संस्कृति को बनाए रखने के उद्देश्य से यूरोपीय संघ से बाहर जाने का फैसला लिया ।
 
यूरोपीय संघ ( निकासी ) विधेयक के कानून बन जाने के उपरांत इसने 2017 के यूरोपीय समुदाय अधिनियम का स्थान ले लिया है । 29 मार्च , 2019 तक ब्रिटेन को यूरोपीय संघ छोड़ देना है । ब्रेक्जिट डे यानी 29 मार्च , 2019 से ब्रिटिश कानून ही मान्य होंगे । 29 मार्च , 2019 से 21 महीने का संक्रमण चरण ( Transition phase ) शुरू होगा और यह दिसंबर 2020 के अंतिम दिन खत्म होगा ।यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने के समझौते के लिये तैयार मसौदे को ब्रेक्जिट ड्राफ्ट डील कहा जा रहा है ।

    बाहर निकलने की मांग का कारण 
    
1  सदस्यता शुल्क - ईयू हर साल सदस्यता शुल्क के तौर पर ब्रिटेन से बिलियन ऑफ पाउंड लेता है तथा बदले में उसे बहुत कम राशि मिलती है । यह राशि लगभग 13 बिलियन पाउंड है , जो दूसरे देशों की अपेक्षा काफी अधिक है । सदस्यता के लिये ईयू के सभी 28 देश कुछ - न - कुछ राशि EU को देते हैं , लेकिन ब्रिटेन के लिये यह राशि काफी अधिक है और बदले में उसे सिर्फ 7 बिलियन युरो वापिस मिलते हैं ।अत : UK ( ब्रिटेन ) को काफी नुकसान उठाना पड़ता है ।

2 .प्रशासनिक अड़चन - UK में कोई भी प्रशासनिक कार्य करने के दौरान काफी अड़चनें आती हैं ।बहुत अधिक डॉक्यूमेंटेशन तथा बहुत सारे कार्यालयों द्वारा काम होता है ।कई सारी प्रणालियाँ हैं , जिनको पूरा करना पड़ता है ।तमाम ऐसे प्रतिबंध हैं , जिनसे UK के विकास में रुकावट आ रही है तथा यूरोपीय यूनियन UK को पीछे ढकेल रही है , उसे आगे बढ़ने से रोक रही है ।

3 स्वायत्तता - लोगों का कहना है कि ईयू इंग्लैंड को उसके अधिकारों और स्वयं कानून बनाने से वंचित कर रहा है खासतौर से फिशरीज से संबंधित कानून । UK के चारों ओर फिशरीज इंडस्ट्री काफी विकसित है और इस उद्योग को लेकर नियम - विनियम ईयू के द्वारा बनाए जाते हैं ।= 1 ईयू की संसद तय करती है कि UK के मछुआरे कितनी मात्रा में मछली पकड़ सकते हैं तथा एक्सपोर्ट रेट क्या रहेगा।

4 अर्थव्यवस्था - अगर यूरोपीय यूनियन से UK अलग हो जाता है , तो वह अपने आपको फाइनेंसियल सुपर पॉवर बना सकता है क्योंकि लंदन को पहले से ही वित्तीय राजधानी कहा जाता है ।वहाँ का वित्तीय बाजार दुनिया के बड़े बाजारों में से एक है । जबकि ईयू द्वारा UK को ऐसा करने से रोका जा रहा है ।

5 इमीग्रेशन - यह एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि सीरिया में सिविल वार के चलते काफी संख्या में अप्रवासी भागकर यूरोप आ रहे हैं ।7 इमीग्रेशन नीति भी ईयू तय करता है , न कि UK , अगर वह ईयू से हट जाता है तो उसे अपनी खुद की इमीग्रेशन नीति तय करने का अधिकार होगा ।

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