अबुल फजल की रचना अकबरनामा

अकबरनामा — इस ग्रन्थ की रचना बादशाह अकबर के शासनकाल में अबुल फजल ने की थी । अबुल फजल विद्वान था। उसने कई ग्रन्थों की रचना फारसी भाषा में की और कई संस्कृत की पुस्तकों का अनुवाद फारसी में किया। अकबरनामा को तीन भागों में बाँटा गया है । पहले भाग में अमीर तैमूर से लेकर हुमायूँ तक के मुगल - शासकों के इतिहास का वर्णन किया गया है। दूसरे और तीसरे भाग में 1502 ई . तक के बादशाह अकबर के इतिहास को दिया गया है। अकबरनामा को तैयार करने में अबुल फजल ने फारसी भाषा में लिखे गये विभिन्न ग्रन्थों की सहायता ली जिनमें तुजुक - ए - बाबरी, हुमायूँनामा, ताजकीरात उल - वाकियात, ताजकीरात - ए - हुमायूं और अकबर तथा तारीख - ए - रशीदी प्रमुख थे। उसने इतिहास की उपयोगिता और लेखन - कला की उपयोगिता के सम्बन्ध में अकबरनामा की एक बड़ी प्रस्तावना लिखी। बाबर के काल के इतिहास को लिखते हुए उसने उसके चरित्र, व्यक्तित्व, युद्ध - शैली, विद्वत्ता के कार्य, उसका अपने मित्रों और सम्बन्धियों के प्रति व्यवहार आदि का विवरण दिया और, इस प्रकार तुजुके - बाबरी की अपूर्णता को पूर्ण करने का प्रयत्न किया। उसने हुमायूँ की कठिनाइयों उसके सम्बन्धियों और भाइयों से उसके सम्बन्ध, शेरशाह से उसका संघर्ष, भारत छोड़कर जाना और पुनः दिल्ली को जीतना आदि का विस्तृत रूप से वर्णन किया है। अबुल फजल मुगल - वंश का पक्षधर था । इस कारण उसने शेरशाह को एक षड्यन्त्रकारी और हुमायूँ की असफलता का कारण उसके दुर्भाग्य को बताया। बादशाह अकबर के बारे में तो उसका विवरण और भी अधिक विस्तृत है। उसने अकबर द्वारा किये गये सैनिक अभियानों, उसकी विभिन्न नीतियों और उनके कारण और परिणामों पर पूर्ण प्रकाश डाला। अकबर का मित्र होने के नाते वह उसकी भावनाओं, महत्त्वाकांक्षाओं और उसकी परिस्थितियों को ठीक प्रकार समझता था और उसने उनका वर्णन प्रभावशाली भाषा में किया। इस प्रकार, अकबरनामा मुगल - इतिहास को जानने का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत - ग्रन्थ है। परन्तु इसका एक दोष भी है । उसने मुगल - बादशाहों बाबर , हुमायूँ और मुख्यतया अकबर के व्यक्तित्व को बहुत उज्ज्वल ढंग से प्रस्तुत किया जबकि उनके शत्रुओं शेरशाह और इस्लामशाह को नीचा दिखाने का प्रयत्न किया। इस कारण सूर - वंश के इतिहास को समझने के लिए अकबरनामा के अतिरिक्त अन्य ग्रन्थों का भी अध्ययन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त , अबुल फजल की भाषा अलंकारपूर्ण है जिससे उसके वर्णन में अतिशयोक्ति आ गयी है। इन त्रुटियों के अतिरिक्त अकबरनामा एक उपयोगी स्रोत - ग्रन्थ है ।

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