*अल्बर्ट आइंस्टीन (1897-1955)
1879 ई. में उल्म, जर्मनी में जन्मे अल्बर्ट आइंस्टाइन को आज तक के सार्वत्रिक रूप से महानतम माने जाने वाले भौतिक विज्ञानियों में से एक माना जाता है। उनका विस्मयकारी वैज्ञानिक जीवन उनके द्वाराा वर्ष 1905 में मैं प्रकाशित तीन क्रांतिकारी शोध पत्रों से आरंभ हुआ उन्होंने अपने प्रथम स्वर पत्र में प्रकाश को अंतर की धारणा को प्रस्तावित किया तथा इस धारा का उपयोग प्रकााााश विद्युत प्रभाव के उस लक्ष्य की व्याख्या करने में किया जिसे विकिरण के चिर सम्मत तरंग सिद्धांत द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकताा था। अपने दूसरे शोध पत्र में उन्होंने ब्राउनी गति का सिद्धांत विकसित कियाा जिसकी पर योगिक पुष्टि कुुछ वर्ष पश्चात हुई। सिद्धांत ने द्रव्य के परमाण्विक चित्रण के विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किए। उनके तीसरे शोध पत्र ने आपेक्षिकता के विशिष्ट सिद्धांत को जन्म दिया जिसने आइंस्टीन को उनके ही जीवन काल में किवदंतीी बना दिया। अगले दशक में उन्होंने अपने नए सिद्धांतों के परिणामों का अन्वेषण किया जिसमें अन्य तत्वों के साथ साथ द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता को एक सुप्रचलित समीकरण E=mc2 द्वारा स्थापित किया गया।
* सर सी वी रमन (1888-1970)
चंद्रशेखर वेंकटरमन का जन्म 7 नवंबर 1888 ई. को हुआ था। उन्होंनेे अपनी स्कूली शिक्षा 11 वर्ष की आयु में आयु में पूरी करके प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास से स्नातक की उपाधि ग्रहण की। शिक्षा समाप्त करने के पश्चात उन्होंने भारत सरकार की वित्तीय सेवाओं में कार्यभार संभाला।
* कोलकाता में रहते हुए संध्या काल में उन्होंने डॉक्टर महेंद्र लाल सरकार द्वारा स्थापित इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन आफ साइंस में अपनी रुचि के क्षेत्र में कार्य करना आरंभ कर दिया। उसकी रुचि के क्षेत्र में कंपन वाद्य यंत्रों की विविधता पराश्रव्य तरंगें विवर्तन आदि सम्मिलित थे।
*वर्ष 1917 में लंदन की रॉयल सोसाइटी ने इनका सोसायटी के फलों के लिए निर्वाचन किया तथा वर्ष 1930 में इनके कार्य जिसे अब रमन प्रभाव कहते हैं के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से विभूषित किया गया।