सामान्य विज्ञान - 06 : विज्ञान एवं उसकी शाखाएं

Day - 06

  • निम्नतापिकी (Cryogenics) - विज्ञान की इस शाखा में अति निम्न ताप की उत्पत्ति, नियन्त्रण व उसके अनुप्रयोगों का अध्ययन किया जाता है। अभी तक लगभग 10-8 केल्विन (परम शून्य के अति निकट) तक के निम्न ताप प्राप्त्किए जा चुके हैं। Cryo अक्षर समूह का अर्थ है - निम्न ताप से सम्बन्धित।
  • कोशिकाविज्ञान (Cytology) - इसमें पादप व जन्तु कोशिका की उत्पत्ति, संरचना एवं उनके कार्यो का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।
  • क्रायोसर्जरी (Cryosurgery) - यह शल्य-चिकित्सा विज्ञान की अत्याधुनिक शाखा है जिसमें अतिशीतलन द्वारा रोगी कोशिकाओं को नष्ट करके उपचार करने की विधि का अध्ययन किया जाता है।
  • अंगुलिछापविज्ञान (Dactylography)  - संसार में किन्ही दो व्यक्तियों की अंगुलियों की छाप एक समान नही होती है। इस तथ्य से सम्बन्धित सभी पहलुओं का अध्ययन अंगुलिछापविज्ञान में किया जाता है।
  • डेन्ड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology) - यह वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पेड़ोके वृध्दि वलयों द्वारा उनकी ज्ञात करने की विधियों का अध्ययन किया जाता है।
  • पारिस्थितिकी (Ecology) - इस शाखा में जीवधारियों पर उनके चारों ओर पर्यावरण के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।
  • भ्रुणविज्ञान (Embryology) - यह जीवविज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत भ्रुण (Embryo) की उत्पत्ति, संरचना एवं विकास का सम्पूर्ण अध्ययन किया जाता है।
  • कीटविज्ञान (Entomology) - जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि विज्ञान की इस शाखा में कीटों (Insects) का सम्पूर्ण अध्ययन किया जाता है।
  • जानपदिक रोग विज्ञान (Epidemiology) - यह चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जानपदिक रोगों (Epidemic Diseases, जैसे - प्लेग, हैजा, चेचक, आदि महामरियों) की उत्पत्ति, प्रसार व उपचार का अध्ययन किया जाता है।
  • व्यवहार विज्ञान (Ethology) - इस शाखा में मानव सहित सभी जन्तुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  • एथनोलॉजी (Ethnology) - विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत मनुष्य की जातियों का अध्ययन किया जाता है।

शेष फिर अगले नोटस् में...

Posted on by