पटाखे चलाने के बारे में कोर्ट ने पटाखा चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से मना कर दिया (Arjun Gopal & Ors. V. Union of India & Ors.)
पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ ऐसे व्यापारी ही इसकी बिक्री कर सकते हैं जिनके पास लाइसेंस है। इसके अलावा कोर्ट ने उस समय का निर्धारण भी कर दिया जिसके बीच पटाखा छोड़े जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी धर्मों पर पटाखों को लेकर ये आदेश लागू हों
-धार्मिक जलसों में भी पटाखे जलाने पर बैन लगा दिया गया है।
-सिर्फ लाइसेंसधारी ही पटाखे बेच पाएंगे।
-तेज आवाज़ वाले पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से बैन रहेगा।
-केवल ग्रीन और सेफ पटाखे ही बेचे जाएंगे।
-दिवाली के दिन रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की छूट दी गई है। यानि केवल 2 घंटे ही पटाखे जलाए जा सकेंगे।
-पटाखों की ऑनलाइन सेल पर भी बैन लगा दिया गया है।
-न्यू ईयर और क्रिमसम पर भी पटाखे जलाने का वक्त निर्धारित कर दिया गया है। रात 11.55 से 12.30 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे।
-पटाखे केवल कुछ खास चिन्हित स्थानों पर ही जलाने की अनुमति होगी। जिन्हे एक हफ्ते के भीतर चिन्हित कर लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया है कि अगर किसी इलाके में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हुआ तो उसका जिम्मेदार उस इलाके के इंचार्ज को माना जागा।
बरी किए जाने के ख़िलाफ़ पीड़ित को अपील का अधिकार (Mallikarjun Kodagali (Dead) ... vs The State Of Karnataka)
एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नज़ीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि अपील की विशेष अनुमति लिए बिना ही कोई पीड़ित किसी आरोपी के बरी होने के ख़िलाफ़ अपील कर सकता है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने बहुमत के इस फैसले में कहा, “कानून की सरल भाषा और कई हाईकोर्टों की इस बारे में व्याख्या और फिर संयुक्त राष्ट्र की महासभा के प्रस्ताव द्वारा दिये गए फैसले के आधार पर यह काफी स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 2 में जिसे पीड़ित कहा गया है, उसे उस कोर्ट में अपील का अधिकार होगा जिस कोर्ट में साधारणतया सजा के खिलाफ अपील की जाती है”। इस तीन सदस्यीय पीठ के एक सदस्य न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर ने इस फैसले से सहमति जताई जबकि न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने इसके खिलाफ अपना फैसला लिखा।