सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 के दौरान दिए महत्त्वपूर्ण फ़ैसले (भाग - 09)

जीएसटी की वैधता  (Union of India & Anr. V. Mohit Mineral Pvt. Ltd.)

न्यायमूर्ति एके सीकरी और अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को मुआवज़ा) अधिनियम, 2017 को वैध ठहराया। कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर मुआवज़ा शुल्क नियम, 2017 को भी सही ठहराया।

एससी/एसटी अधिनियम का दुरुपयोग  (Dr. Subhash Kashinath Mahajan V. State of Maharashtra & Anr.)

(हालकि केंद्र सरकार ने कानुन पास कर इस फसले को खत्म कर दिया है) सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों का दुरुपयोग रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। कोर्ट ने इस अधिनियम के प्रावधानों की पड़ताल के क्रम में कहा कि इस अधिनियम का दुरुपयोग रोकने के लिए अब सरकारी कर्मचारियों को पूर्व अनुमति के बिना इस अधिनियम के तहत गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता।

कानून बनाने वाले वक़ील   (Ashwini Kumar Upadhyay V. Union of India & Anr.)

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने भाजपा नेता और वक़ील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर अपने फ़ैसले में सांसदों और विधायकों को वक़ील के रूप में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने से मना कर दिया। 

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