उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराना (Public Interest Foundation & Ors. V. Union of India & Anr.)
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़, और इन्दु मल्होत्रा की पाँच सदस्यों की पीठ ने कहा कि किसी उम्मीदवार के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले में आरोपपत्र दाख़िल होने के कारण उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है। पीठ ने यह फ़ैसला भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, पूर्व सीईसी जेएम लिंग्दोह और एक एनजीओ पब्लिक इंट्रेस्ट फ़ाउंडेशन की जनहित याचिका पर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जघन्य आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने को लेकर अपनी राय व्यक्त करते हुए फैसला देने में असमर्थता जतायी है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संसद के क्षेत्राधिकार में है। कहा कि जघन्य अपराधों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने पर फैसला देना संसद के क्षेत्राधिकार में घुसने जैसा होगा। कोर्ट के अनुसार वह लक्ष्मण रेखा पार नहीं करना चाहता।
मुख्य न्यायाधीश रोस्टर का मास्टर (Shanti Bhushan V. Supreme Court of India)
अधिवक्ता शांतिभूषण की याचिका को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रोस्टर का मालिक है और उसे पीठों के गठन और केसों के बँटवारे का पूरा अधिकार है। शांतिभूषण ने सीजेआई के अधिकारों के विनियमन के बारे में याचिका दायर की थी। [