सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 के दौरान दिए महत्त्वपूर्ण फ़ैसले (भाग - 11)

एनडीपीएस का जाँच अधिकारी और सूचना देने वाला एक ही नहीं हो सकता   (Mohan Lal V. State of Punjab)

न्याय  केवल होना चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। पक्षपात की किसी भीआशंका या पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष का निषेध किया जाना चाहिए।’ (Copy)

एक महत्त्वपूर्ण फैसले में, तीन जजों की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस मामलों में सूचना देने वाला और जांच करने वाला दोनों ही एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय  पीठ जिसमें न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर भानुमती और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा शामिल हैं सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों की पीठ ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस मामले की जाँच करने वाला अधिकारी और उसके बारे में सूचना देने वाला अधिकारी अगर एक ही है तो आरोपी को बरी किए जाने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये दोनों ही अधिकारी एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता।

कठुआ    (Mohd. Akhtar V. State of Jammu & Kashmir)

कठुआ में आठ साल की एक लड़की के साथ हुए बलात्कार और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को पंजाब के पठानकोट सत्र न्यायालय में ट्रांसफ़र कर दिया। पहले इस मामले की सुनवाई जम्मू एवं कश्मीर ज़िला और सत्र अदालत में चल रही थी।

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