सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 के दौरान दिए महत्त्वपूर्ण फ़ैसले (भाग - 13)

विदेशी विधि फ़र्म   (Bar Council of India V. A. K. Balaji& Ors.)

न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और यूयू ललित की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एक फ़ैसले में कहा कि विदेशी विधि फ़र्म भारत में अपना कार्यालय स्थापित नहीं कर सकते और न ही 'आते जाते हुए' अपने मुवक्किलों को क़ानूनी सलाह दे सकते हैं। पीठ ने केंद्र और बीसीआई को यह भी कहा कि वे इस बारे में नियम बनाएँ।

कर छूट में अस्पष्टता   (Commissioner of Customs (Import), Mumbai vs. M/s. Dilip Kumar and Company)

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अगर कर छूट से संबंधित सूचना में किसी तरह की स्पष्टता है तो इसका लाभ राजस्व विभाग को मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कर में छूट के बारे में किसी भी सूचना को कठोरता से व्याख्या की जानी चाहिए और यह नियम किसके पक्ष में है यह साबित करने का ज़िम्मा करदाता की है।

स्वतः ज़मानत    (Achpal @ Ramswaroop & Anr. Vs. State of Rajasthan)

अगर किसी भी आरोपी के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र मजिस्ट्रेट ने किसी तकनीकी कारण से वापस कर दिया है तो उस स्थिति में आरोपी को स्वतः ज़मानत का अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्यों की पीठ ने कहा कि कोई भी अदालत सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत रिमांड की अवधि को 90 दिनों से आगेनहीं बढ़ा सकता है। कोर्ट ने कहा की किसी भी कोर्ट को किसी भी व्यक्ति को 90 दिनों से अधिक समय तक बिना आरोपपत्र के जेल में बंद नहीं रख सकता।

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