जनांकिकीय अध्यन किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में वहां की जनसंख्या के स्वरूप एवं वितरण के संदर्भ में व्यवस्थित अध्ययन को संबोधित करती है।यहां जनसंख्या के स्वरुप में लिंग अनुपात एवं आश्रित तथा उत्पादक जनसंख्या के अनुपात इत्यादि को सम्मिलित किया जा सकता है।इससे भिन्न में जनसंख्या के वितरण में विभिन्न क्षेत्रों के जनसंख्या घनत्व को सम्मिलित किया जा सकता है। इसमें धर्म प्रजाति इत्यादि के आधार पर जनसंख्या के वितरण को भी सम्मिलित किया जा सकता है।
किसी भी भौगोलिक क्षेत्र की जनसंख्या को तीन महत्वपूर्ण आधार प्रभावित करते हैं-
जन्म
मृत्यु
प्रवासन
यह सभी एक दूसरे के पूरक भी हो सकते हैं अथवा एक दूसरे के विरोधाभासी भी हो सकते हैं। उदाहरण स्वरुप यदि जन्म दर उच्च हो एवं मृत्यु दर निम्न हूं यह दोनों के एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं एवं जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है। इसी तरह यदि जन्म दर उच्च हो एवं अंदर की ओर प्रवासन भी ज्यादा हो तो दोनों ही एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं एवं जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
प्रवासन जो कि भौगोलिक क्षेत्र के जनसंख्या को प्रभावित करती हैं।उसे परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि यह किसी एक प्रशासनिक क्षेत्र से किसी अन्य प्रशासनिक क्षेत्र में स्थाई एवं अस्थाई आवास परिवर्तन की प्रक्रिया है।यदि प्रवासन एक बार हो एवं हमेशा के लिए हो जाए तो इसे टर्मिनल प्रवासन कहते हैं।यहां पर वासी उसी प्रशासनिक क्षेत्र में पुनः लौटकर नहीं आता है।प्रवासन की स्थिति में लोग कम दूरी वाले स्थानों को वरीयता देते हैं इसे चरणबद्ध प्रवासन कहते हैं। जैसे-जैसे दूरी बढ़ती जाती है प्रवासन किधर घटती जाती है इसे दूरी के अपघटन का सिद्धांत कहते हैं।प्रवासन का गुरुत्वाकर्षण मंडल यह कहता है कि जैसे जैसे किसी भौगोलिक क्षेत्र में आर्थिक अवसर बढ़ते हैं उस भौगोलिक क्षेत्र की ओर प्रवासन की दर बढ़ जाती है।