जनांकिकी अध्ययन-२ (प्रवासन के प्रकार)

प्रवासन को दो प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

internal migration (एक ही देश के भीतर)

external migration (एक देश से दूसरे देश)

आंतरिक प्रवासन एक ही देश के भीतर एवं प्रशासनिक क्षेत्र से किसी अन्य प्रशासनिक क्षेत्र में स्थाई एवं अस्थाई आवास परिवर्तन को संबोधित करता है। यह वह प्रवासन है जो एक देश के भीतर उत्पन्न होता है। इसे पुनः 4 प्रारूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

१-ग्रामीण से ग्रामीण क्षेत्र की ओर

२-ग्रामीण से शहरी क्षेत्र की ओर

३-शहर से शहरी क्षेत्र की ओर

४-शहर से ग्रामीण क्षेत्र की ओर

इन चार प्रकारों में से सर्वाधिक आंतरिक प्रवासन भारत में ग्रामीण से ग्रामीण क्षेत्रों में होता है जिसका प्रमुख कारण विवाह है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत के अधिकांश क्षेत्रों में एक ही गांव में विवाह वर्जित है। इसके बाद सर्वाधिक प्रवासन ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र की ओर देखा जाता है। इसका प्रमुख कारण रोजगार के अतिरिक्त अवसर, स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा एवं साथ ही साथ शहरी जीवन शैली का आकर्षण हो सकते हैं।

        इससे भिन्न बाय प्रवासन एक देश से अन्य देश की ओर देखा जाता है।

इसे पुनः दो प्रमुख प्रारूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

१-immigration (आप्रवासन)

२- emigration (उत्तप्रवासन)

आप्रवासन प्रवासन का वह रुप है जिसमें अन्य देशों के नागरिक हमारे देश आते हैं।

इससे भिन्न उत्प्रवासन प्रवासन का वह रूप है जिसमें हमारे देश से लोगों का पलायन किसी अन्य देश में होता है।

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