पेशेवर अदालत प्रबंधक (All India Judges Association & Ors. V. Union of India & Ors.)
सुप्रीम कोर्ट ने सभी मुख्य ज़िला और सत्र अदालतों में एमबीए डिग्रीधारी पेशेवर अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति का निर्देश दिया है ताकि कोर्ट के प्रशासन को सक्षमता से चलाया जा सके। कोर्ट ने इस बात पर अफ़सोस ज़ाहिर की कि अदालतों में सुविधाओं के बारे में कोई ध्यान नहीं दिया गया है।पेशेवर अदालत प्रबंधकों की अवश्य ही नियुक्ति की जानी चाहिए और अगर वे एमबीए डिग्रीधारी हों तो ज्यादा बेहतर है। इस तरह के पद सभी न्यायिक जिलों में बनाए जाने चाहिएं ताकि वह कोर्ट प्रशासन में और प्रमुख जिला और सत्र जजों की मदद कर सकें।
मौत की सजा के ख़िलाफ़ विशेष अनुमति याचिका (BabasahebMarutiKamble V. State of Maharashtra)
न्यायमूर्ति एके सीकरी, अशोक भूषण और इंदिरा बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जिन मामलों में अभियुक्तों को मौत की सज़ा दी गई है उन मामलों में विशेष अनुमति याचिका को बिना कारण बताए ख़ारिज नहीं किया जा सकता।
कम दृष्टता वाले एमबीबीएस (कमजोर दृष्टि वाले छात्र) (PurswaniAshutosh V. Unionof India & Ors.)
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कमजोर दृष्टि (लो विजन) से पीड़ित छात्र को एमबीबीएस कोर्स करने की इजाजत दे दी है। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता के शारीरिक विकलांगता श्रेणी में नीट-यूजी पास करने को आधार बनाते हुए यह फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने एक फ़ैसले में कहा कि जिन लोगों को काम दिखाई देता है उन्हें एमबीबीएस में बेंचमार्क विकलांगता कोटे के तहत प्रवेश देने से मना नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत ऐसे लोगों को प्रवेश दिए जाने का प्रावधान है और इसलिए भारतीय चिकित्सापरिषद ऐसे छात्रों को प्रवेश देने से माना नहीं कर सकता।