सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 के दौरान दिए महत्त्वपूर्ण फ़ैसले (भाग - 15)

आपराधिक सुनवाई में गवाहों से पूछताछ     (State of Kerala Vs Rasheed)

न्यायमूर्ति एएम सप्रे और इन्दु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के एक निर्णय को निरस्त करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 231(2) के तहत गवाहों से पूछताछ पर स्थगन देते समय आरोपी के अधिकार और अभियोजन के विशेषाधिकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए।

“सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत किसी आवेदन पर निर्णय लेने के दौरान, अभियुक्त के अधिकारों के बीच एक बनाया जाना चाहिए”।

खंडपीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत आवेदन करने के दौरान निम्नलिखित कारकों पर गौर किया जाना चाहिए :

  • गवाह/गवाहों पर अनुचित प्रभाव की आशंका;
  • गवाह/गवाहों को धमकी देने की आशंका;
  • यह आशंका कि अगर स्थगन नहीं दिया गया तो गवाह एक ही तरह के तथ्यों के आधार पर ऐसी रटी-रटाई बातें कह सकता है जो अभियोजन की बचाव रणनीति को बिगाड़ेगा;
  • उस गवाह/गवाहों की स्मृति हानि की आशंका जिससे पूछताछ हो चुकी है; 
  • तथा सीआरपीसी की धारा 309 (1) के संदर्भ में, अगर मुल्तवी की अनुमति दी गई तो मुकदमे में देरी हो सकती है और गवाह अनुपलब्ध हो सकते हैं। 

कावेरी     (State of Karnataka vs. State of Tamil Nadu)

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने कर्नाटक राज्य को 192 टीएमसी के बदले तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का 177.25 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस बारे में कर्नाटक की अपील मान ली।

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