ध्वनि

* ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो श्रवण की संवेदना पैदा करती है। * ध्वनि तरंगों के रूप में गमन करती हैं। ध्वनि कम्पायमान वस्तुओं से उत्पन्न होती है। पदार्थ जिसमें हो कर गमन करती हैं, माध्यम कहलाता है । * ध्वनि तरंगे यांत्रिक तरंग  कहलाती है। क्योंकि उनके संचरण के लिए द्रव्य आत्मक माध्यम आवश्यक होता है।

* ध्वनि की चाल

 ध्वनि की चाल उस माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करती है जिसमें से होकर वह गमन करती है ध्वनि की चाल भिन्न-भिन्न माध्यमों में भिन्न-भिन्न होती है। गैसों में ध्वनि की चाल अत्यंत धीमी गति , द्रवों में तीव्र गति से और ठोस में तीव्रतम गति से गमन करती है। ध्वनि निर्वात में गमन नहीं कर सकती। ध्वनि वायु की अपेक्षा स्टील में लगभग 15 गुना तीव्र गति से गमन कर सकती है।

* ध्वनि की चाल तापमान पर निर्भर करती है जैसे-जैसे वायु का तापमान बढ़ता है उस में ध्वनि की चाल भी बढ़ती जाती है अतः वायु में ध्वनि की चाल ठंडे दिनों की अपेक्षा गर्म दिनों में अधिक होगी।

* ध्वनि की चाल वायु की आद्रता पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे वायु की आद्रता बढ़ती है उसने धवन की जाल भी बढ़ती है। स्पष्ट है कि ध्वनि शुष्क वायु में धीमी गति से परंतु आद्र वायु में तीव्र गति से गमन करती है।

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