भारतीय संविधान में मुख्यमंत्री पद की योग्यता की विशेष जानकारी..

मुख्यमंत्री पद के लिए संविधान में कोई योग्यता विहित नहीं की गयी है , लेकिन मुख्यमंत्री के लिए यह आवश्यक है कि वह  राज्य विधानसभा का सदस्य हो । इस प्रकार मुख्यमंत्री में राज्य विधानसभा के सदस्य की योग्यता होनी चाहिए । राज्य विधानसभा का सदस्य न होने वाला व्यक्ति भी मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त किया  जा सकता है। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि वह 6 मास के अन्तर्गत राज्य विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हो जाये 21 सितम्बर , 2001 को उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार किसी सजायाफ्ता को मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य माना जाएगा ।

"कर्तव्य तथा अधिकार" मुख्यमंत्री के कर्तव्य तथा अधिकार निम्नलिखित हैं-

वह राज्य के शासन का वास्तविक अध्यक्ष है और इस रूप में वह अपने मंत्रियों तथा संसदीय सचिवों के चयन उनके विभागों के वितरण तथा पदमुक्ति और लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों एवं महाधिवक्ता और अन्य महत्त्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए राज्यपाल को परामर्श देता है, राज्य में असैनिक पदाधिकारियों के स्थानान्तरण के आदेश मुख्यमंत्री के आदेश पर जारी किये जाते हैं तथा वह राज्य की नीति से सम्बन्धित विषयों के सम्बन्ध में निर्णय करता है । वह राष्ट्रीय विकास परिषद में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है तथा सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धान्त का पालन करता है । यदि मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य मंत्रिपरिषद की नीतियों से भिन्न मत रखता है , तो मुख्यमंत्री उसे त्यागपत्र देने के लिए कहता है या राज्यपाल उसे बर्खास्त करने की सिफ़ारिश कर सकता वह राज्यपाल को राज्य के प्रशासन तथा विधायन सम्बन्धी  सभी प्रस्तावों की जानकारी देता है । यदि मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य ने किसी विषय पर अकेले  निर्णय लिया है, तो राज्यपाल के कहने पर उस निर्णय को मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ रख सकता है । वह राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सलाह देता है । सामान्यतः मुख्यमंत्री अपने पद पर तब तक बना रहता है , जब तक उसे विधानसभा का विश्वास मत प्राप्त रहता है । अतः  जैसे ही उसका विधानसभा में बहुमत समाप्त हो जाता है , उसे  त्यागपत्र दे देना चाहिए । यदि वह त्यागपत्र नहीं देता है , तो राज्यपाल उसे बर्खास्त कर सकता है । इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री लिखित स्थितियों में बर्खास्त किया जा सकता है यदि राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा का अधिवेशन बुलाने  तथा उसमें बहुमत सिद्ध करने की सलाह दे और यदि राज्यपाल  के द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर मुख्यमंत्री विधानसभा का अधिवेशन बुलाने के लिए तैयार नहीं हो , तो राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकता है । यदि राज्यपाल अनुच्छेद 356 के अधीन राष्ट्रपति को यह रिपोर्ट दे कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता या राष्ट्रपति को अन्य स्रोतों यह समाधान हो जाए कि शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता , तो राष्ट्रपति मुख्यमंत्री को बर्खास्त करके राज्य का शासन चलाने का निर्देश राज्यपाल को दे सकता जब मुख्यमंत्री के विरुद्ध राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित हो जाए और मुख्यमंत्री त्यागपत्र देने से इन्कार कर दे , तब राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकता है ।

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