* किसी चालक में विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। धनात्मक आवेश के प्रवाह की दिशा ही विद्युत धारा की दिशा मानी जाती है। स्पष्ट है कि विद्युत धारा की दिशा ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन की दिशा के विपरीत होती है।
* विद्युत धारा के प्रकार
* विद्युत धारा दो प्रकार की होती है :-
(1) डायरेक्ट करंट
(2) अल्टरनेटिंग करट
*डायरेक्ट करंट :- यदि किसी परिपथ मेंं धारा एक ही दिशा मेंं बहती है तो उसे डायरेक्टट करंट कहते। बैटरी इत्यादि से प्राप्त धारा डायरेक्टट करंट कहलाती है ।
* अल्टरनेटिंग करंट :- ऐसी धारा जिसके मान मान एवं दिशा समय के साथ आवर्ती रूप से परिवर्तित होते रहते हैं, प्रत्यावर्तीी धारा या अल्टरनेटिंग करंट कहलाती है। अल्टरनेटर दोलित्र आदि से होने वाली विद्युत धारा प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।
* दिष्ट धारा की अपेक्षा प्रत्यावर्ती धारा का प्रमुख लाभ यह है कि प्रत्यावर्ती धारा को विद्युत ऊर्जा की अधिक हानी के बिना लंबी दूरियों तक संप्रेषित किया जा सकता है।
* विद्युत वाहक बल
किसी विद्युत ऊर्जा उत्पादक उपकरण द्वारा उत्पन्न किया गया वह बन जिसके कारण किसी चालक या परिपथ में प्रवाह स्थापित किया जाता है, विद्युत वाहक बल कहलाता है।
विभव : किसी इकाई धन आवेश अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदुु तक लाने मैं किए गए कार्य को उस बिंदु का विवो कहलाता है।