भारतीय कर प्रणाली (भाग-1)

    भारतीय संविधान के अनुसार 264 से 289 में केंद्र और राज्य सरकारों के वित्तीय संबंधों की व्याख्या की गई है। बे कर जिनका अंतरराज्य आधार है, केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाते हैं जबकि स्थानीय आधार वाले कर राज्य सरकार द्वारा लगाए जाते हैं। अवशिष्ट अधिकार केंद्र सरकार को प्राप्त है।

    संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय स्रोतों का विभाजन किया गया है। सातवीं अनुसूची की प्रथम सूची में उन करो का वर्णन है जो केंद्र द्वारा पूर्णतया लगाए जाते हैं इन्हें संघीय कर कहते हैं। दूसरी सूची में उन करो का वर्णन है जो पूर्णता राज्यों के अधिकार में आते हैं इन्हें राज्य कर कहते हैं। उपरोक्त दो सूचियों के  अतिरिक्त संविधान में तीसरी समवर्ती सूची है।

    केंद्र सरकार द्वारा लगाए करो को चार भागों में विभाजित किया जाता है -

1.   ऐसे कर, जो केंद्र सरकार द्वारा लगाए तथा वसूल किए जाते हैं। इनसे प्राप्त राजस्व केंद्र सरकार के पास ही रहता है।

2.   ऐसे कर, जो केंद्र द्वारा लगाए जाते हैं तथा एकत्रित किए जाते हैं, किंतु उनसे प्राप्त आय का अंश राज्य सरकारों को बांट दिया जाता है।

3.   ऐसे कर, जो केंद्र द्वारा लगाए जाते हैं किंतु राज्य सरकारों द्वारा एकत्र एवं प्रयुक्त किए जाते हैं।

4.   ऐसे कर, जो केंद्र द्वारा लगाए तथा एकत्र किए जाते हैं किंतु उनसे प्राप्त समस्त आय राज्य सरकारों के मध्य बांट दी जाती है।

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