भारतीय कर प्रणाली (भाग-2)

    भारत में दीर्घ कालीन राजकोषीय नीति की घोषणा वर्ष 1995 में की गई थी। परंतु उदारीकरण की प्रक्रिया के तहत भारत में कर सुधार जनवरी 1991 से राजा जे चेलैया समिति की सिफारिश से आरंभ होता है। इसके बाद कर सुधार के संदर्भ में वर्ष 2001 में केलकर समिति गठन की गई। वर्तमान में भारत में किए जा रहे कर सुधारों को दो भागों में बांटा जा सकता है।

1.  प्रत्यक्ष कर

2.  अप्रत्यक्ष कर

    प्रत्यक्ष कर-

    वह कर है जिसका कराघात एवं करापात एक ही व्यक्ति या स्थान पर पड़ता है। प्रत्यक्ष कर के भार का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है। अर्थात जिस पर कर लगाया जाता है वही सरकारी खजाने में कर को जमा करता है और उस पर भी कर का मौद्रिक प्रभाव तथा तात्कालिक प्रभाव पड़ता है। आयकर, निगम कर, अनुलाभ कर, बीसीटीटी, उपहार कर, एसटीटी, संपत्ति कर, मृत्यु कर, उत्तराधिकारी कर, व्यय कर, प्रत्यक्ष कर के उदाहरण हैं ।

   आयकर-

    भारत में आयकर दो प्रकार का होता है - व्यक्तिगत कर तथा निगम कर।

   व्यक्तिगत कर-

    सामान्य तौर पर आय का अर्थ इसी से लगाया जाता है। भारत में आयकर अधिनियम 1969 के तहत आयकर लगाया जाता है। 

   निगम कर-

    वर्ष 1960-61 के पूर्व कंपनियों पर उनके लाभ पर जो कर लगाया जाता था उसे सुपर टैक्स कहते थे। वर्ष 1960-61 में इसे समाप्त कर दिया गया। उसके स्थान पर कंपनियों के निवल लाभ पर जो कर लगाया गया उसे निगम कर कहते हैं।

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