विषाणु व कैंसर
सन् 1911 में अमेरिकन विषाणुविद् डॉ० पेयटन राउस ने बताया कि चूजों में सार्कोमा नामक कैंसर रोग के लिए विषाणु उत्तरदायी हैं। उनकी राय को तब कोई महत्व नहीं दिया गस्या परन्तु बाद में खोजों से यह स्पष्ट हो गया कि अनेक प्रकार के कैंसर, विषाणुओं के कारण होते है। राउस की खोज की महत्ता तब समझ में आई और 1966 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पक्षियों में सार्कोमा उत्पन्न करने वाले विषाणु का नाम भी राउस सार्कोमा वाइरस रखा गया।
मनुष्यों में विषाणु जनित कुछ रोग -
विषाणुओं के संक्रमण द्वारा कोशिका के उपापचय (metabolism) में विकृति उत्पन्न हो जाती है, जो भिन्न भिन्न विषाणुओं से विभिन्न प्रकार की होती है। इससे रोगलक्षण भी पृथक् पृथक् होते हैं। विषाणु संक्रमण के बाद मनुष्य में अधिकतर प्रतिरक्षा (immunity) उत्पन्न हो जाती है। अभी विषाणुओं के संक्रमण की चिकित्सा की विशेष (specific) ओषधि नहीं मिली है।
.1. एड्स - प्रतिरक्षा तंत्र -एचआइवी
लक्षण : रोग प्रतिरोधक क्षमता का नष्ट हो जाना
2. पोलियो.- .गला, नाड़ी, रीढ़ - पोलियो
लक्षण : बदन में दर्द, बुखार, रीढ़ की हड्डी एवं आँत की कोशिका नष्ट हो जाती है.
3. पीलिया/हिपटाइटिस - यकृत
लक्षण : त्वचा में पीलापन, पेशाब पीला होना, आँख में पीलापन
4. खसरा - सम्पूर्ण शरीर - मोर्बिली वायरस
लक्षण : शरीर पर लाल- लाल दाने निकल आना
5. डेंगू ज्वर - सम्पूर्ण शरीर (विशेषकर सिर, आँख एवं जोड़) - अरबो वायरस
लक्षण : सिर, आँख एवं जोड़ में दर्द
6. इन्फ्लूएंजा - सम्पूर्ण शरीर - मिक्को वायरस [एबीसी]
लक्षण: गलशोंथ, बेचैनी, छींक आना
7. छोटी माता - सम्पूर्ण शरीर - वैरिसेला वायरस
लक्षण :हल्का बुखार, शरीर पर पित्तिकाएँ
8. ट्रेकोमा - आँख
लक्षण: आँख का लाल होना, आँख में दर्द होना
9. रेबीज - तंत्रिका तंत्र - रैब्डो विषाणु
लक्षण: इस रोग से रोगी पागल हो जाता है व जीभ बाहर की ओर निकालता है. यह कुत्ते एवं बन्दर के काटने से होता है.
10. मेनिनजाइटिस - मस्तिष्क
लक्षण: तेज बुखार
11. हर्पीज - त्वचा - हर्पीस
लक्षण: त्वचा में सूजन होना
12. गलशोंथ - पैराथाइराइड ग्रंथि -
लक्षण: मुँह खोलने में कठिनाई व ज्वर
13. चेचक - सम्पूर्ण शरीर- वैरिओला विषाणु
लक्षण: तेज बुखार, शरीर पर लाल, लाल दाने