लोक लेखा समिति

प्राक्कलन समिति की जुड़वा बहन के रूप में ज्ञात इस समिति में 22 सदस्य होते हैं जिसमें 15 सदस्य लोकसभा द्वारा तथा 7 सदस्य राज्य सभा द्वारा एक वर्ष के लिए निर्वाचित किए जाते हैं।इसे लघु लोकसभा भी कहते हैं।समिति के सदस्यों का संसद द्वारा प्रतिवर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत प्रणाली की सहायता से चयन किया जाता है।इस समिति के अध्यक्ष का मनोनयन लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा किया जाता है तथा लोकसभा सचिवालय इस समिति के कार्यालय की भूमिका अदा करता है।1967 में पहली बार श्री मीनू मसानी विरोधी दल के नेता बने तो उन्हें लोक लेखा समिति का अध्यक्ष भी मनोनीत कर लिया गया और उसी समय से विरोधी दल के सदस्यों में से किसी सदस्य को इस समिति के अध्यक्ष मनोनीत करने की परंपरा की शुरुआत की गई।लोक लेखा समिति में राज्यसभा के सदस्यों को सह-सदस्य माना जाता है तथा उन्हें मत देने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

यह समिति अपना प्रतिवेदन लोकसभा को देती है जिससे कि जो अनियमितताएं उसके ध्यान में आई उन पर संसद में बहस हो और उन पर प्रभावी कदम उठाया जा सके।

लोक लेखा समिति के कार्य-

यह समिति भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा दिया गया लेखा परीक्षण संबंधी प्रतिवेदनों की जांच करती है।भारत सरकार के वह के लिए सदन द्वारा प्रदान की गई राशियों का विनियोग दर्शाने वाली रेखाओं की जांच करना भी इसी का कार्य है। संसद द्वारा प्रदान की गई धनराशि के अतिरिक्त धनराशि को व्यय किया गया हो तो समिति उन परिस्थितियों की जांच करती है जिसके कारण अतिरिक्त व्यय करना पड़ा।लोक लेखा समिति राष्ट्रपति के वित्तीय मामलों के संचालन में अधिक व्यय, भ्रष्टाचार,अक्षमता में कमी के किसी प्रमाण को खोज सकती है।

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