PSLV C-45 के विषय में संक्षिप्त जानकारी

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अंतरिक्ष में भारतीय rocket polar satellite लांच व्हीकल (PSLV)  सी-45 द्वारा उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण  किया है । इसको आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया है इस प्रक्षेपण में इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस उपग्रह एमिसैट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है  इसके साथ राकेट 28 अन्य विदेशी उपग्रह को भी लेकर गया है इसरो द्वारा छोड़ा गया राकेश पहले 436 किलोग्राम एमिसैट को 748 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में स्थापित करेगा । PSLV C-45 द्वारा जिन उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया है उनमें सबसे महत्वपूर्ण इमिसैट उपग्रह हैं  इसका मुख्य रूप से उपयोग DRDO को डिफेंस रिसर्च में सहयोग करना है। एमिसैट के साथ अमेरिका के 24 लिथुआनिया का 1 स्पेस का 1 और स्वीटजरलैंड का 1 सेटेलाइट भी इसके साथ भेजा गया है।

 इस इसरो द्वारा भेजा गया 47वां PSLV प्रोग्राम है जबकि पहली बार ऐसा हुआ है कि जिसके जरिए इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सेटेलाइट को लांच किया गया है इसमें सबसे पहले रॉकेट ने 748 किलोमीटर की एक कक्षा में इनसेट को स्थापित किया और फिर उसके बाद 504 किलोमीटर ऑर्बिटर की दूरी पर 28 अन्य सेटेलाइट को भी उसने स्थापित किया । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का यह पहला मिशन है जिसे आम लोगों की मौजूदगी में लांच किया गया है ,यह एक विशेष उपलब्धि है । जो भविष्य में अती महत्वपूर्ण साबित होगी।  जिसके कारण से यह हाल में इतना चर्चा का विषय बन गया है इसको सुरक्षा की निगरानी से भारत के लिए एक अति महत्वपूर्ण उपग्रह माना गया है। क्योंकि इससे इसरो और DRDO ने मिलकर बनाया है यह उपग्रह पृथ्वी से 465 मील की दूरी से भारत की सीमा पर होने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों की पल पल की जानकारी  देगा, मुख्य रूप से इसका उद्देश्य पाकिस्तान और चीन की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक गतिविधि पर नजर रखना है क्योंकि इन देशों के द्वारा  गतिविधि होने से सुरक्षा का खतरा बना रहता है साथ-साथ यह भारत की सीमा पर उपग्रह रेडर और सेंसर पर निगाह रखेगा । यह उपग्रह न केवल मानवीय बल्कि संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर नजर रखेगा। अर्थात सुरक्षा की दृष्टि से यह अति महत्वपूर्ण है जिसके द्वारा किसी भी आपत्ति जनक स्थिति में उससे निपटने के लिए सहयोगी साबित होगा। 

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