अटलांटिक महासागर के उत्तरी गोलार्ध में पाई जाने वाली जलधाराएं-

अगर उत्तरी गोलार्ध में देखे तो भूमध्य रेखा  के ऊपर 0° अक्षांश से 10° अक्षांश तक जो जल धारा बहती है उसे उत्तर विषुवत जलधारा की संज्ञा दी जाती है। जैसे ही यह जलधारा ऊपर की ओर 15° अक्षांश जाती है यह दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है। एक भाग कैरीबियन सागर की ओर चला जाता है तो दूसरा भाग ऊपर की ओर चला जाता है जिसे एंटिलीज जलधारा कहते हैं। 

एंटिलीज जलधारा जब ऊपर की ओर बढ़ती है तो फ्लोरिडा की खाड़ी से फ्लोरिडा जलधारा आकर मिलती है और इस तरह गल्फ स्ट्रीम धारा का निर्माण होता है। यह विश्व की सबसे तीव्र गति से बहने वाली जलधारा है। गल्फ स्ट्रीम धारा जब ऊपर की ओर चलती है तो तभी ऊपर से बैफिन की खाड़ी से लैब्राडोर जलधारा आती है, और दोनों जिस स्थान पर मिलती हैं वहां पर फोग का निर्माण करती हैं। यहां गर्म और ठंडी जलधारा के मिलने के कारण यह स्थान मछली पालन के लिए अनुकूल हो जाता है। इस स्थान को ग्रैंड बैंक भी कहा जाता है।


इसके बाद आगे चलकर उत्तर अटलांटिक प्रवाह बनता है जो तीन भागों में विभाजित हो जाता है।
1-ऊपर की ओर आइसलैंड के नीचे से जाने वाली जलधारा इरमिंगर धारा कहलाती है। 
2-दूसरी फ्रांस और स्पेन से होकर गुजरती है इसे रेनेेल धारा कहते हैं।
3-और तीसरी भूमध्य रेखा की ओर जाती है जो कनारी धारा कहलाती है।

Posted on by