अप्रत्यक्ष कर-
अप्रत्यक्ष कर व्े कर होते हैं जिसमें कराघात किसी भी व्यक्ति पर होता है और उप कराघात किसी दूसरे व्यक्ति पर। अप्रत्यक्ष कर के भारों का स्थानांतरण किया जाता है अर्थात अप्रत्यक्ष कर तत्कालीन भर कोई एक बहन करता है और वास्तविक मौद्रिक भार कोई दूसरा व्यक्ति बहन करता है। सीमा शुल्क, सेवा शुल्क, उत्पाद शुल्क, विक्रीकर, सेनवैट, मोडवैट, वेट आदि अप्रत्यक्ष कर के उदाहरण है।
सीमा शुल्क-
सीमा शुल्क ऐसे शुल्क या कर हैं जो देश में आयातित वस्तु अथवा देश से निर्यातक वस्तुओं पर लगाए जाते हैं। आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगे शुल्क को आयात शुल्क तथा निर्यात की गई वस्तुओं पर लगे शुल्क को निर्यात शुल्क कहते हैं। इस समय निर्यात शुल्क नहीं लगाया जाता है क्योंकि आयात शुल्क की सीमा शुल्क केेा पर्याय हो गया है वर्तमान में सीमा शुल्क की उच्चतम दर को गैर कृषि उत्पादों के लिए 15% से घटाकर 10% कर दिया गया है।
सेवा कर-
सातवीं अनुसूची में केंद्र, राज्य एवं समवर्ती सूची बनाई गई है यदि कोई मद ऐसा है जो उपरोक्त तीनों सूची में नहीं आता है उसे अवशिष्ट मद कहा जाता है।अवशिष्ठ मद पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को है। केंद्र सरकार ने अपने इस अधिकार का प्रयोग करते हुए सर्व प्रथम वर्ष 1994-95 में चेलैया समिति की सिफारिश पर तीन सेवाओं (टेलीफोन, सामान्य बीमा तथा स्टाफ ब्रोकर्स) पर 5% की दर से सेवा कर लगाया।