भारतीय कर प्रणाली (भाग-6)

  संशोधित मूल्य वर्धित कर मोड़वैट-

    वर्ष 1976 में लक्ष्मीकांत समिति का गठन किया गया जिसमें भारत में वैट लागू करने की सिफारिश की। व्ैट मूल रूप से बिक्री कर से संबंधित है। परंतु 1 मार्च 1986 में इसे उत्पाद शुल्क के संदर्भ में मोड वैट बिक्री कर या व्यापार के स्थान पर लागू किया गया।

  उत्पाद शुल्क-

    वर्ष 1990-91 में भारत में उत्पाद शुल्क के संदर्भ में 11 प्रकार के कर थे। जिससे हमारी उत्पाद शुल्क की व्यवस्था काफी जटिल हो गई थी। कर सरलीकरण की प्रक्रिया के तहत उत्पाद शुल्क की दरों को धीरे धीरे कम किया जाने लगा। वित्त मंत्री ने वर्ष 2000-01 के केंद्रीय बजट में उत्पाद शुल्क के संदर्भ में 16% की एकल दर लागू की थी जिसका नाम सेंट्रल वैल्यू ऐडेड टैक्स रखा गया।

  मूल्य वर्धित कर-

    भारत में वैट केंद्र एवं राज्य दोनों स्तर पर लगाया जाता है। केंद्र स्तर पर वेट उत्पाद शुल्क के संदर्भ में मोड वैट के रूप में लागू किया जाता है। जबकि राज्य स्तर पर वैट बिक्री कर या व्यापार के स्थान पर लगाया जाता है।

  NOTE-

    किसी राष्ट्र की समृद्धि में कर प्रणाली का प्रभावी योगदान होता है। नागरिकों से कर के रूप में प्राप्त राजस्व से ही आधारभूत संरचना तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों को दिशा दी जाती है।  किसी भी समृद्ध तथा विकसित राष्ट्र की पृष्ठभूमि में प्रभावी कर प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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