केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी)-
केंद्रीय बिक्री कर ऐसा कर है जिसे केंद्र सरकार लगाती है पर जिसकी वसूली राज्य सरकार करती है। तथा इसकी राजस्व प्राप्ति राज्य द्वारा ही ले ली जाती है। यह एक प्रकार का विशिष्ट कर है जिसका भुगतान वस्तु के उपयोग करने वाले राज्य के नागरिकों द्वारा किया जाता है। तथा वस्तु के उत्पादक राज्य को राजस्व की प्राप्ति होती है। यह एक मान्यता है कि केंद्रीय बिक्री कर एक मूल्य आधारित कर है। इसीलिए यह वैट से मेल नहीं खाता है क्योंकि यह एक गंतव्य आधारित करता है। इतना ही नहीं सीएसटी एक कैस्केडिंग वाला कर हैै क्योंकि यह वैट की तरह नहीं है। इसलिए स्कोर क्रमिक रूप से समाप्त करना आवश्यक है।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी)-
जीएसटी लागू करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों में सहमत फरवरी 2013 में बनी थी लेकिन यह लागू नहीं हो पाया था। केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की नई दिल्ली में 14 फरवरी 2013 को संपन्न हुई इस बैठक में इस मामले में दोनों पक्षों के बीच एक राय बनी। जीएसटी के कार्यान्वयन के लिए वांछित संविधान संशोधन के लिए राज्य ने अपनी सहमति इस बैठक में दे दी थी।
देश की कर व्यवस्था अब सही मायने में प्रगतिशील कही जा सकती है। कर प्रणाली में सुधार के साथ-साथ सरकार के कर राजस्व में प्रत्यक्ष करों का अंश बढ़ता जा रहा है। कर किसी भी देश की आय का महत्वपूर्ण साधन है। इस आय के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं तथा इसके साथ-साथ संरचनात्मक विकास में इस आय का महत्वपूर्ण योगदान होता है।