परमवीर चक्र विजेता कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत और हवलदार अब्दुल हमीद

कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत-

    राजपूताना राइफल्स के हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत झुंझुनू के पास बेरी गांव में 20 मई 1918 को जन्मे थे। वर्ष 1936 में सेना में शामिल हो गए। वर्ष 1947-48 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान यह उतरी टिथवाल (जो जम्मू कश्मीर में है) में तैनात थे। इनकी कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह पहाड़ी पर जमी शत्रु की टुकड़ी पर हमला करके उस पर काबू कर लें। शत्रु ने यहां मशीनगनें तैनात की थी। मेजर पीरू सिंह ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर यह लक्ष्य हासिल किया जबकि उनकी पूरी कंपनी शहीद हो चुकी थी। चेहरे पर ग्रेनेड लगने के बाद भी शत्रु के खेमे में घुसकर उन्होंने उसे तब तबाह कर दिया तथा 19 जुलाई 1948 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें 26 जनवरी 1950 को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया।

हवलदार अब्दुल हमीद-

    वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धाम ग्राम में हुआ था। वर्ष 1954 में सेना की ग्रेनेडियर्स इन्फेंट्री रेजीमेंट में शामिल हुए। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पंजाब के खेमकरण सेक्टर में अग्रिम पंक्ति में तैनात थे।पाकिस्तान ने उस समय अजय माने जाने वाले अमेरिका के पैटन टैंकों के साथ खेमकरण पर  9 सितंबर 1965 को हमला बोल दिया। हवलदार अब्दुल हमीद के पास गन माउंटेड जीप थी जो कि पैटन टैंकों के समक्ष मात्र एक खिलौने के समान थी। परंतु इसी गन माउंटेड जीप में बैठकर हवलदार अब्दुल हमीद ने पैटन टैंकों के कमजोर भागों को निशाना बनाकर हमला करना आरंभ कर दिया। एक एक करके पैटन टैंक नष्ट होने लगे। इसी बीच एक गोला उनकी जीप पर आकर गिरा। जिससे घायल होकर अब्दुल हमीद शहीद हो गए। इसी वीरता और शहादत के लिए उन्हें 26 जनवरी 1966 को परम वीर चक्र से नवाजा गया।

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