राज्य की कार्यपालिका

जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों के लिए संविधान के भाग 6 में राज्य के शासन के लिए प्रावधान किया गया है। राज्यपाल जो कि कार्यपालिका का प्रमुख माना जाता है वह प्रत्यक्ष अथवा अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से कार्यपालिका का उपयोग करता है। प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होता है लेकिन एक ही राज्यपाल को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है।

राज्यपाल की योग्यता-

राज्यपाल पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति का भारत का नागरिक होना 35 वर्ष की आयु पूरा होना तथा किसी प्रकार के लाभ के पद पर नहीं होना और राज्य विधान सभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता होना अनिवार्य होता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्षों के लिए की जाती है और राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है। राज्यपाल का वेतन ₹110000 मासिक है, यदि दो या दो से अधिक राज्यों का एक ही राज्यपाल हो तब उसे दोनों राज्यपालों का वेतन उस अनुपात में दिया जाएगा जैसा कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाए। राज्यपाल को शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अथवा वरिष्ठ न्यायाधीश के द्वारा दिलाई जाती है।

राज्यपाल के विशेषाधिकार-
राज्यपाल जब तक पद पर हो तब तक उसकी गिरफ्तारी का आदेश किसी न्यायालय द्वारा जारी नहीं किया जा सकता तथा राज्यपाल का पद ग्रहण करने से पूर्व व पश्चात उसके द्वारा किए गए कार्य के संबंध में कोई सिविल कार्यवाही करने से पहले उसे 2 महीने पहले सूचित करना पड़ता है।वह अपने पद की शक्तियों के प्रयोग तथा कर्तव्यों के पालन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदाई नहीं है। राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में किसी प्रकार की आपराधिक कार्यवाही नहीं प्रारंभ की जा सकती है।वह अपने पद की शक्तियों के प्रयोग तथा कर्तव्यों के पालन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदाई नहीं होता है।

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