कार्यपालिका संबंधी कार्य-मुख्यमंत्री राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है तथा मुख्यमंत्री की सलाह से उसकी मंत्री परिषद के सदस्यों को भी राज्यपाल ही नियुक्त करता है तथा उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ भी राज्यपाल ही दिलवाता है। राज्य की कार्यपालिका के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं। राज्यपाल द्वारा उच्चाधिकारियों जैसे महाधिवक्ता ,राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों तथा राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति तथा उपकुलपतिओं की नियुक्ति करता है तथा उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति को सलाह प्रदान करता है। वह राज्य के प्रशासन के संबंध में मुख्यमंत्री से सूचना प्राप्त करने का अधिकार रखता है।
राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर राज्यपाल राष्ट्रपति से राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकता है तथा राष्ट्रपति शासन के समय राज्यपाल ही केंद्र सरकार के अभिकर्ता के रूप में राज्य का प्रशासन चलाएगा।
विधायी अधिकार-राज्यपाल विधानमंडल का अभिन्न अंग होने के नाते विधानमंडल का सत्राह्वान तथा सत्रावसान और विघटन करता है तथा राज्यपाल विधान सभा के अधिवेशन तथा दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करता है। वह राज्य विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या का 1 बटा 6 भाग सदस्यों को नियुक्त करता है इनका संबंध विज्ञान, साहित्य, कला, समाज, सेवा, सहकारी आंदोलनों आदि से रहता है।
राज्य विधान मंडल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही अधिनियम बन पाता है।
वित्तीय अधिकार-प्रत्येक वित्तीय वर्ष में वित्त मंत्री को विधानमंडल के सम्मुख वार्षिक विवरण प्रस्तुत करने के लिए राज्यपाल निर्देशित करता है तथा विधानसभा में धन विधेयक राज्यपाल की पूर्व अनुमति से ही पेश किया जाता है।