विषाणुओं के उपयोग

विषाणुओं के उपयोग

यद्यपि विषाणुओं का नाम लेते ही भयानक रोगों की याद आने लगती है, फिर भी विषाणुओं का उपयोग लाभदायक कार्यों में भी सम्भव है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं :

  1. साइनोफेजों (वे विषाणु जो साइनोबैक्टीरिया अर्थात् नीलहरित शैवाल में रोग उत्पन्न करते हैं) का उपयोग अनेक स्थानों पर अवांछित नीलहरित शैवालों को साफ करने में किया जाता है।
  2. हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए बैक्टीरियोफेज का प्रयोग किया जाता है। इनके द्वारा जल को सड़ने से बचाया जा सकता है। गंगा के पानी में जीवाणु भोजियों की उपस्थिति से यह क्रिया स्वतः होती रहती है।
  3. बैक्टीरियोफेजों की सहायता से जीवाणुओं के विभिन्न विभेदों को पहचाना जा सकता है।
  4. विषाणुओं में सजीव एवं निर्जीव दोनों गुण पाए जाते हैं, इसलिए इनका उपयोग जैव विकास के अध्ययन में किया जाता है।
  5. जीवाणुभोजी की सहायता से जीवाणुओं के विभिन्न विभेदों को पहचाना जा सकता है।

वाइरॉइडस

डियनर रेयमर ने 1967 में अत्यधिक्ज साधारण संक्रामक कारकों को खोजा व इनको वाइरॉइड्स नाम दिया। वाइरॉइड्स मात्र छोटे RNA के खण्ड होते हैं तथा इन पर प्रोटीन का आवरण भी नहीं होता है, परन्तु इनमें संक्रमित कर, रोग उत्पन्न करने की क्षमता होती है। ये पादप रोग के संक्रमण हेतु सबसे छोटे कारक होते है

                  नारियल में ‘कंदग-कंदग’ नामक रोग क्रिसेन्थिमम, स्टन्ट, सिट्रस एग्जिकोर्टिस वाइअरस तथा आलू में ‘तर्कू कंद’ रोग इन्हीं के कारण होते हैं।
Posted on by