एड्स के विषय में संक्षिप्त जानकारी

एड्स एक खतरनाक बीमारी है जो HIV  विषाणु से उत्पन्न होता है । hiv शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त कर देता है मुख्य रूप से लिम्फोसाइट को प्रभावित करता है। शुरुआती समय में इसकी पहचान नहीं हो पाती है क्योंकि इसके लक्षण काफी सामान होते हैं जैसे बुखार, मांसपेशियों में दर्द ,पसीने आना ,शरीर पर दाने आदि इसके समान लक्षण होते हैं । एड्स फैलने की कुछ प्रमुख कारक निम्न है -

जैसे - 
-   संक्रमित निडल का उपयोग करना 
-   रक्त का आधान
-   मां का बच्चे को स्तनपान कराना 
-   जन्म के समय संक्रमित मां का रक्त बच्चों के रक्त से      मिलना 
-  असुरक्षित योग संबंध तथा लार के संपर्क से होता है ।
  
इसमें कुछ भ्रांतियां भी हैं -

जैसे - 
-   संक्रमित व्यक्ति के साथ रहना 
-   संक्रमित व्यक्ति के टायलेट का इस्तेमाल करना
-   माथे पर चुंबन करना
-    एक साथ नहाना 
-    हाथ मिलाना   आदि।
    
 इसकी परीक्षण के लिए (ELISA) इलीशा किया जाता है। एड्स के लिए कोई टीका विकसित नहीं हो पाया है , लेकिन कुछ दवाएं जैसे - सुरामीन , साइक्लोस्पोरीन तथा अल्फाइंटरफेरान का  उपयोग किया जा सकता है ।

 HIV  वायरस सर्वप्रथम चिंपांजी बंदर से मनुष्य में पहुंचा यह माना जाता है कि घायल चिंपांजी ने शिकारी को काट लिया था जिससे मनुष्य के रक्त में यह वायरस पहुंच गया तथा अपनी क्षमता को बड़ा दिया।
 
 प्रथम रोगी की पहचान 1881 में सनफ्रांसिस्को शहर में हुआ। जबकि भारत में इसकी सबसे पहली पहचान 1986 में तमिलनाडु में हुई थी।

Posted on by