- विधि (Law) दो प्रकार की होती है – मौलिक विधि (Substantive Law) एवं प्रक्रियात्मक विधि (Procedural Law)
- मौलिक विधि वह है जो अधिकारों एवं कर्त्तव्यों को परिभाषित करती है अथवा उनकी विवेचना करती है। प्रक्रियात्मक विधि वह है जो मौलिक विधि को प्रकट करने के लिए कार्यवाही का निर्धारण करती है।
- भारतीय दण्ड संहिता (I.P.C.), सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम (T.P.A.) आदि मौलिक विधियाँ है जबकि दण्ड प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.), जबकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Evidence Law), सिविल प्रक्रिया संहिता (C.P.C.) आदि प्रक्रियात्मक विधि है।
- जिस समय भारत पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी का आधिपत्य रहा, न्यायिक प्रशासन मुस्लिम दण्ड विधि के अनुसार था। सन् 1882 में सम्पूर्ण भारत वर्ष (प्रेसीडेन्सी नगरों एवं प्रान्तों) के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1882 के नाम से अधिनियमित की गई, जिसे एक दूसरी दण्द प्रक्रिया संहिता 1898 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
- भारत में प्रथम बार सन् 1898 में व्यवस्थित रूप से दण्ड प्रक्रिया संहिता का निर्माण किया गया। यह जम्मू-कश्मीर, नागालैण्ड एवं असम के जनजाति क्षेत्रों को छोड़कर समस्त भारत पर प्रयोज्य थी। इस संहिता में भी समय-समय पर केन्द्रीय विधायिकाओं द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों द्वारा संशोधन किये गये। इसमें केन्द्रीय विधायिका द्वारा सन् 1923 एवं 1955 में किये संशोधन महत्वपूर्ण हैं।
(अभी न्यायिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए Cr.P.C. अत्यंत उपयोगी है, मेरा अध्ययन भी हो रहा है, इस लिये मै अब विज्ञान के नोट्स को विधि के बाद पोस्ट करुंगी। उम्मीद है की आप सभी मेरे विधि से सम्बंधित नोट्स पसंद आयेंगे)
आगे और भी है ....