परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल

    सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का जन्म वर्ष 1950 में पुणे में हुआ था। जून 1971 में 17वीं पूना हार्स रेजिमेंट में बतौर सेकंड लेफ्टिनेंट शामिल हो गए। वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में अग्रिम मोर्चे पर तैनात थे। इस दौरान उनके रेजीमेंट की एक स्क्वाड्रन शंकरगढ़ सेक्टर में अग्रिम मोर्चे पर तैनात थी। इन स्क्वाडर्न ने अपनी रेजीमेंट से मदद मांगी। अरुण खेत्रपाल को उनकी मदद का कार्य मिला। इस अभियान के दौरान बंशतार नदी पार करते समय उनकी टुकड़ी को शत्रु की भीषण गोलाबारी का सामना करना पड़ा। इस भीषण गोलीबारी का सामना करते हुए भी वे सही समय पर दूसरी स्क्वाडन की सहायता के लिए पहुंच गए तथा वहां पुनः भीषण संग्राम छिड़ गया। जिसमें शत्रु के 10 बैंक बर्बाद कर दिए गए। जिसमें से चार स्वयं अरुण खेत्रपाल ने नष्ट किए।

    इस संग्राम के कारण शत्रु को पीछे हटना पड़ा। अंतिम समय में अरुण खेत्रपाल के टैंक में शत्रु का गोला लगने से वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इस असाधारण वीरता तथा दुर्जेय के लिए उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से नवाजा गया। लेफ्टिनेंट अरुण मात्र 21 वर्ष की आयु में 16 दिसंबर 1971 को वीरगति को प्राप्त हुए थे। 26 जनवरी 1972 को उनकी अदम्य वीरता के लिए उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वह सबसे कम आयु में इस सर्वोच्च वीरता सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति भी थे।

Posted on by