दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : परिचय - 02

क्रमशः ...

  • सन् 1955 में भारत सरकार 14वें विधि आयोग नियुक्ति किया गया और उसे सिविल एवं आपराधिक विधि के न्याय-प्रशासन के सम्बन्ध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया। आयोग ने सम्पूर्ण दण्ड प्रक्रिया संहिता की परीक्षा एवं उसके पुनरीक्षण का एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर उसे सितम्बर 1969 को प्रस्तुत किया। आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन पर शासन द्वारा सतर्कता से विचार किया गया और 12 सितम्बर 1973 को लोकसभा ने इस दण्ड प्रक्रिया संहिता को 125 संशोधन के साथ पारित किया। राज्यसभा ने इसे 18 सितम्बर 1973 को अपनी स्वीकृति प्रदान की और अन्ततः 25 जनवरी 1974 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होकर उसने एक नई संहिता दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 का रूप धारण किया। इसे 1 अप्रैल, 1974 से लागू कर दिया गया। दण्ड प्रक्रिया सम्बन्धी विधि का समेकन और संशोधन करने के लिए भारत गणराज्य जे चौबीसवें वर्ष में भारत संसद द्वारा ‘दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973’ अधिनियमित की गई।
  • जब कोई अपराध किया जाता है, तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन दोनों प्रकार की प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है। दंड प्रक्रिया संहिता के द्वारा ही अपराधी को दंड दिया जाता है।

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