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वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवा कर व वैटी के स्थान पर एक नया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लाने के लिए 115 वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में 22 मार्च 2011 को प्रस्तुत किया गया था। विधेयक के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में 15 मार्च 2011 को अनुमोदित किया था। जीएसटी 1 अप्रैल 2012 से लागू करने की सरकार की योजना थी। इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि मौजूदा स्थिति में केंद्र सरकार विनिर्माण के चरण के ऊपर कर नहीं लगा सकती थी, जबकि राज्य सरकारों को सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार नहीं था।
115 वां संविधान संशोधन विधेयक में वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी) के संबंध में कानून बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य दोनों को ही अधिकार प्रदान करने का प्रस्ताव था। संसद में प्रस्तुत विधेयक में एक जीएसटी परिषद के गठन का भी प्रस्ताव था। जिसके अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होंगे जबकि इसके सदस्यों में राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे। परिषद का गठन राष्ट्रपति के आदेश के जरिए किया जाएगा।
विधेयक में प्रस्तावित जीएसटी विवाद निपटारा अधिग्रहण की संरचना के संबंध में फैसला संसद द्वारा ही किया जाएगा। संसद में प्रस्तुत विधेयक के मसौदे में पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, डीजल व इटीएफ को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। और पुनः तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में एक बार फिर से यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया। लेकिन इस बार यह विधेयक पास हो गया और 1 जुलाई 2017 को एक अप्रत्यक्ष कर के रूप में जीएसटी को लागू किया गया।