क्रमशः ....
पुरानी दण्ड संहिता बहुत जटिल और आम आदमी के समझ के परे थे। बहुत कमीयांं जो थी, सभी को नई संहिता में सुधार कर क्रमबध्ध तरीके से सुसज्जित कर सरलतम रूप में अधिनियमित किया गया।
नई संहिता के प्रमुख उद्देश्य
- नई दण्ड प्रक्रिया संहिता, (1973) का निर्माण जिन उद्देश्यों को लेकर किया गया उनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं –
- अभियुक्त व्यक्ति के मामले का विचारण “नैसर्गिक न्याय के सिध्दान्तों (Principles of Natural Justice) “ के अनुसार किया जाना चाहिए।
- अन्वेषण एवं विचारण में विलम्ब को टालने के लिए यथासम्भाव प्रयास किया जाना चाहिए।
- प्रक्रिया की पेचीदगी को दूर करके उसे सरल बनाया जाना चाहिए ताकि समाज का निर्धन वर्ग भी न्याय प्राप्त करने के लिए आश्वस्त हो सके।
इस प्रकार नई संहिता का मुख्य उद्देश्य न्यायिक कार्यवाहियों में नैसर्गिक न्याय के सिध्दान्तों का पालन करना, विलम्ब को टालना एवं प्रक्रिया को सरल बनाना रहा है।
साधारणतः दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 एक प्रक्रियात्मक विधि है किन्तु साथ ही इसमें कुछ ऐसे उपबन्ध हैं जो मौलिक विधि की प्रकृति के है, जैसे –
- अपराधों के निवारण के कार्य (Preventive Action of Offences)
- भरण-पोषण के लिए आदेश (Order For Maintenance)
आगे और भी है ....