क्रमशः ....
नई संहिता की प्रमुख विशेषताएँ
- नई संहिता को पुरानी संहिता की अपेक्षा कुछ सरल बनाया गया है जिसमें 565 धाराओं के स्थान पर 484 धाराओं को स्थान दिया गया है।
- नई संहिता की प्रथम विशेषता न्यायपालिका (Judiciary) को कार्यपालिका (Executive) से पृथक करना रहा है। इस प्रकार मजिस्ट्रेट के कार्यों को न्यायिक एवं कार्यपालिकीय मजिस्ट्रेट के बीच विभाजित कर दिया गया है।
- आपराधिक मामलों में यदि अभियुक्त हिरासत में है तो आरोप पत्र (Charge Sheet) पुलिस द्वारा न्यायालय में 60 दिन (कुछ गम्भीर मामलों में 90 दिन) में प्रस्तुत करना होता है और ऐसा नहीं किये जाने पर अभियुक्त को जमानत पर छोड़ दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
- विचारण के दौरान कारावास में व्यतीत हुए समय को न्यायालय द्वारा दिये गये कारावास के दण्ड से कम कर दिया गया है।
- किसी भी व्यक्ति को चाहे उसे वारंट के द्वारा या वारंट के बिना गिरफ्तार किया गया हो, गिरफ्तारी के कारण से अवगत कराना आवश्यक है और यदि वह जमानतीय है तो उसे जमानत पर मुक्त होने के तथ्य से अवगत कराया जाना आवश्यक है।
- साक्षियों को समन डाक द्वारा भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। छोटे-छोटे मामलों (Petty Cases) में अभियुक्त को डाक द्वारा अभिवचन प्रस्तुत करने का अधिकार दिया गया है।
आगे और भी है ....