क्रमशः ....
7. धारा 154 के अधीन F.I.R. लिखवाने वाले व्यक्ति को उसकी एक प्रति निःशुल्क दिये जाने का प्रवधान किया गया है।
8. यदि कोई पुलिस अधिकारी F.I.R. अभिलिखित करने से इंकार करता है तो पीड़ित व्यक्ति को ऐसी सूचना डाक द्वारा पुलिस अधीक्षक (S.P.) को भेजने का प्रावधान किया गया है।
9. राज्य सरकार द्वारा प्रावधान किये जाने पर ऐसे व्यक्ति को जिसे पुलिस द्वारा अन्वेषण के दौरान साक्ष्य के लिए बुलाया जाता है, व्यय दिये जाने की व्यवस्था की गई है।
10. रिमाण्ड के दौरान व्यतीत हुए कारावासीय समय को न्यायालय द्वारा दिये गये कारावास के दण्द से कम कर दिया जाता है।
11. सेशन-मामलों में प्रारम्भिक जाँच को त्याग दिया गया है।
12. जूरी के विचारण को अब समाप्त कर दिया गया है।
13. इस संहिता में तृतीय श्रेणी के मजिस्ट्रेटों को स्थान नही दिया गया है।
14. अन्तरिम आदेशों (Interim Orders) के विरुध्द अब पुनरीक्षण (Revision) के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है।
15. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की शक्तियों को कम कर दिया गया है। अब कार्यपालिकीय दण्डाधिकारी को केवल धारा 107, 133, 144, 145, एवं 151 के अन्तर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार दिया गया है।
16. संक्षिप्त विचारण के क्षेत्र को विस्तृत कर दिया गया है। अब दो वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय अपराधों का संक्षिप्त विचारण किया जा सकता है।
आगे और भी है ....