सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
- भारत सरकार ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) पारित किया।
- इस अधिनियम की उद्देशिका में यह स्पष्ट उल्लेख है कि यह कानून संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 30 जनवरी, 1997 को पारित किए गये प्रस्ताव के अनुसरण में पारित किया गया है।
- इस अधिनियम की धारा 1(2) के अनुसार यह कानून सम्पूर्ण भारत में लागू होगा।
- इस अधिनियम की धारा 3 द्वारा अंकित हस्ताक्षर द्वारा इलेक्ट्रानिक अभिउलेखों के अधिप्रमाणन को मान्यता प्रदान की गई है।
- इस अधिनियम में कम्प्यूटर से सम्बन्धित विभिन्न साइबर अपराधों के लिए दाण्डिक प्रावधान हैं तथा इनके सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही हेतु न्याय-निर्णयन अधिकारियों का प्रावधान है। इनके निर्णयों की अपील साइबर रेगुलेशन्स एपेलेट ट्रिब्यूनल में हो सकती हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 60 के अनुसार कम्प्यूटर के माध्यम से वर्ल्ड वाइट वेबसाइट पर अश्लील समाग्री के प्रचार, प्रसार या संग्रह के लिए दोषी व्यक्ति को 2 वर्ष तक के कारावास एवं 2 लाख रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया जा सकता है और यदि अपराध पुनः किया जाता है, तो 10 वर्ष तक का कारावास एवं 2 लाख रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया जा सकेगा।
- सूचना प्रौद्योगिकी के सुचारू रूप से संचालन एवं नियंत्रण हेतु अधिनियम के अन्तर्गत एक शक्ति सम्पन्न प्राधिकारी की व्यव्स्था है जिसे ‘कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथारिटीज’ कहा गया है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 463 से 477–क में कई संशोधन किये।