- अधिनियम की धारा 1 में इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ की तिथि उल्लिखित है।
- इस अधिनियम का नाम दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 है।
- इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है।
- यह अधिनियम 1 अप्रैल 1974 से प्रवृत्त हुआ।
- यह अधिनियम 1974 का अधिनियम संख्याक 2 है।
- धारा 1 के उपखण्ड (2) के परन्तु के अनुसार जहाँ तक नागालैण्ड राज्य और जनजाति क्षेत्रों का प्रश्न है तो यहाँ पर दण्ड प्रक्रिया संहिता के केवल निम्नलिखित प्रावधान लागू होते हैं, शेष नहीं –
- संहिता के अध्याय - 8 (प्रतिभूति सम्बन्धी कार्यवाहियाँ)
- अध्याय – 10 (लोक व्यवस्था एवं शांति बनाये रखना, तथा)
- अध्याय – 11 (पुलिस द्वारा निवारक कार्यवाहियाँ) से सम्बन्धित प्रावधान।
किन्तु नागालैण्ड राज्य तथा जनजाति क्षेत्रों की सरकार अधिसूचना द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता के शेष उपबंधो को इन क्षेत्रों में भी लागू करती है।
- धारा 1 के उपखण्ड (2) में ‘जनजाति क्षेत्र’ से वे राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं जो 21 जनवरी, 1972 से ठीक पहले भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के पैरा 20 में यथानिर्दिष्ट असम के जनजाति क्षेत्रों में सम्मिलित थे और जो शिलांग नगरपालिका की स्थानीय सीमाओं के भीतर क्षेत्रों से भिन्न है।
- नई दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 का प्रारूपण वस्तुतः दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 के स्थान पर हुआ। धाराओं की दृष्टि से नई संहिता, पुरानी संहिता की अपेक्षा छोटी है क्योंकि पुरानी दण्ड संहिता 1898 के कुल 565 धाराएं तथा 5 अनुसूचियाँ थीं जो 46 अध्यायों में विभक्त थीं जबकि नई संहिता (1973) में केवल 484 धाराएं तथा 2 अनिसूचियाँ हैं जो 37 अध्यायों में विभक्त है।
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