दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : प्रारम्भिकी (धारा 1-5) - 02

क्रमशः ..

  • यद्यपि नई दण्ड प्रक्रिया संहिता का विस्तार जम्मू-कश्मीर पर नही है तथापि माधव कुमार बनाम सुदेश कुमारी’ (1974) के वाद में उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि इस संहिता का विस्तार भले ही जम्मू-कश्मीर पर नही है लेकिन पति के जम्मू-कश्मीर में आयकर विभाग में पदस्थ होने मात्र से भरण-पोषण की राशि के लिए उसके वेतन को कुर्क करने पर रोक नही होगा और वह पत्नी के भरण पोषण मे दायित्व से बच नहीं सकता है।
  • दण्ड प्रक्रिया संहिता का विस्तार निम्नलिखित पर भी होगा –
    1. पोत – राज्य क्षेत्र की परिधि में इसके पोत भी सम्मिलित होते हैं चाहे भले ही वह आयुध युक्त हों या आयुधविहिन हों, संहिता के प्रावधान लागू होते हैं।
    2. वायुयान – पोत की भांति भारत में रजिस्ट्रीकृत वायुयान भी भारत के संघीय राज्य-क्षेत्र की परिधि में सम्मिलित माने जाएंगे। भले ही वे विदेश में ही क्यों न हों।
    3. आकाश – भारतीय राज्य-क्षेत्र के ऊपर का आकाश ऊंचाई तक के विस्तार के अधीन भारत राज्य क्षेत्र की परिधि में सम्मिलित होगा।
    4. भारतीय दूतावास – विदेशों में जो भारतीय दूतावास स्थित है, वे भी भारतीय राज्य क्षेत्र की अधिकारिता के अधीन आएंगे। यदि इन दूतावासों में कोई अपराध किया जाता है, तो उसकी जांच या विचारण दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबन्धों के अधीन किया जा सकेगा।
  • दण्ड प्रक्रिया संहिता विश्लेषणात्मक प्रक्रिया विधि (Analytical Procedure Law) है। यह वह अस्त्र है जिसके द्वारा अपराधी के मन में संत्रास उत्पन्न करके समाज में अपराध की बढ़ती हुई प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सकती है तथा अपराधों से समाज का संरक्षण किया जा सकता है।
  • दण्ड प्रक्रिया संहिता का मूल उद्देश्य भारतीय दण्ड संहिता में वर्णित विभिन्न अपराधों के विचारण के लिए विशेष नियम विहित करना है। इस संदर्भ में वस्तुतः दोनों संहिताओं को एक साथ पढ़ा जाना चाहिए। कुछ परिभाषाएं तो दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत वर्णित है किन्तु इनके अभाव में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषा भारतीय दण्ड संहिता (I.P.C.) से भी अंगीकृत की जा सकती है।
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