शनि ग्रह
इस ग्रह के 62 उपग्रह है ।
सूर्य से इसकी औसत दूरी 1,457 मिलियन किलोमीटर है।
यह सूर्य की परिक्रमा 29.5 वर्षों में पूरा करता है ।
इसका औसत घनत्व 0.7 है जो सभी ग्रहो से कम है तथा यह जल में तैर सकता है ।
इसका द्रव्यमान पृथ्वी के सापेक्ष्य में 92 गुना है।
इसकी औसत कक्षीय गति 9.6 किमी/सेकेंड है।
इसका पलायन वेग 36 किमी/सेकेंड है इसलिए
इस पर हल्की गैसें नहीं पाई जाती हैं।
इसकी आंशिक संरचना बृहस्पति से मिलती है, शनि का केंद्र चट्टानी है।
अतः यह अपने अक्ष पर 10 घंटे में एक बार घूर्णन कर लेता है । घूर्णन के कारण यह सौरमंडल का सर्वाधिक चपटा ग्रह है।
इसके वायुमंडल की रसायनिक संरचना बृहस्पति के वायुमंडल से मिलती है।
शनि ग्रह की चारों ओर वलय पाए जाते हैं ।
पृथ्वी से शनि का रंग पीला दिखाई देता है।
शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है, सौरमंडल का यही एक मात्र उपग्रह है जिसके पास अपना स्थाई वायुमंडल है।
शनि का दूसरा बड़ा उपग्रह रिया एवं तीसरा बड़ा उपग्रह इयायेटस है ।
शनि के अन्य उपग्रहों मे डिओन, टेथीस, एटलस, फोइबे, हेलेन एवं मिमास हैं।
शनि को गैसों का गोला कहा जाता है, यह आकाशगंगा सदृश ग्रह है।
मंगल ग्रह
यह पृथ्वी सदृश ग्रह है। इसके दिन की लंबाई तथा इसका अक्षीय झुकाव पृथ्वी के सदृश है ।
सूर्य से मंगल की औसत दूरी 227 मिलियन किलोमीटर है।
मंगल के दक्षिणी गोलार्ध पर अधिक क्रेटर हैं।
मंगल के ध्रुवों की बर्फ कार्बन डाइऑक्साइड का जमा रूप होती है।
मंगल का वायुमंडल बिरल है, इसके वायुमंडल के धरातल पर दबाव पृथ्वी के समुद्र तल पर वायुमंडलीय दबाव के 1% से भी कम है।
मंगल के धरातल का सबसे बड़ा कैनियान वालेस मेरीनेरस है।
मंगल ग्रह पर कार्बन डाइऑक्साइड सर्वाधिक मात्रा में पाई जाती हैं।