आज दैनिक जीवन की कार्यप्रणाली में साइबरस्पेस का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। सरकारें प्रशासन, शिक्षा ,संचार और सूचना के विस्तार में इसका बढ़-चढ़कर प्रयोग कर रही हैं। जहां एक और सूचना प्रौद्योगिकी ने जीवन को सुगम एवं सरल बना दिया है वहीं दूसरी और आधुनिक जीवन में बहुत से चुनौतियां उत्पन्न है। आज रेलवे, एयरलाइंस, बैंक, स्टॉक मार्केट, अस्पताल के अलावा सामान्य जीवन से जुड़ी हुई सभी सेवाएं कंप्यूटर नेटवर्क के साथ जुड़ी हैं। इनमें से तो कई पूरी तरह से इंटरनेट पर ही आश्रित हैं। यदि उनके नेटवर्क के साथ छेड़छाड़ की गई तो सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।साइबरस्पेस एक ऐसा क्षेत्र है जहां बिना किसी खून खराबे की किसी भी देश की सरकार को आतंकित किया जा सकता है। साइबरस्पेस के जरिए आतंक फैलाने वाले, कंप्यूटर से महत्वपूर्ण जानकारियां निकाल सकते हैं। तथा इनका इस्तेमाल धमकी देने व सेवाओं को बाधित करने में कर सकते हैं।
साइबर स्पेस कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा जुड़ कर आपसी संपर्क से बनने वाले वातावरण को कहते हैं। इंटरनेट पर किया गया हर काम साइबरस्पेस के दायरे में आता है।जैसे ऑनलाइन बुकिंग ,फेसबुक का उपयोग, गूगल का प्रयोग आदि। साइबरस्पेस की कोई सीमा नहीं है।
साइबरस्पेस 1990 के दशक में लोकप्रिय हुआ जब इंटरनेट तेजी से बढ़ रहा था और उससे उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों और सामाजिक एवं मानसिक परिघटनाओं के लिए एक संक्षिप्त शब्द की आवश्यकता हुई। साइबर स्पेस कृत्रिम वास्तविकता के सिद्धांत पर कार्य करता है।